February 17, 2026
National

कर्नाटक हाईकोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ किया मानहानि का केस खारिज

Karnataka High Court dismisses defamation case against Rahul Gandhi

17 फरवरी । कर्नाटक हाईकोर्ट ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी की तरफ से लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि की याचिका खारिज कर दी। यह याचिका कथित तौर पर पार्टी के खिलाफ प्रचार करने के आरोप में दायर की गई थी।

यह मामला विधानसभा चुनाव के दौरान पिछली भाजपा सरकार को टारगेट करते हुए एक ‘करप्शन रेट कार्ड’ ऐड से जुड़ा है। राहुल गांधी ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को रद्द करने के लिए एक पिटीशन फाइल की थी। जस्टिस सुनील दत्त यादव के नेतृत्व वाली बेंच ने कहा कि कार्रवाई जारी रखने की इजाजत देना कानून के प्रोसेस का गलत इस्तेमाल होगा।

शिकायत भाजपा नेता केशव प्रसाद ने फाइल की थी। उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, डिप्टी मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और राहुल गांधी पर बसवराज बोम्मई की अगुवाई वाली तत्कालीन भाजपा सरकार के खिलाफ झूठे ऐड पब्लिश करने का आरोप लगाया था।

पिटीशन में आरोप लगाया गया था कि आरोपियों ने उस समय की भाजपा सरकार पर 40 प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप लगाते हुए एक कैंपेन के तहत मीडिया में पूरे पेज के ऐड जारी किए थे। राहुल गांधी ने इसे सोशल मीडिया ‘एक्स’ के अपने हैंडल पर शेयर किया था।

शिकायत में कहा गया है कि 5 मई, 2023 को सभी मेनस्ट्रीम अखबारों में छपे इस ऐड में भाजपा के खिलाफ मनगढ़ंत, बेबुनियाद और बेतुके आरोप लगाए गए थे।

कोर्ट में कांग्रेस सांसद के खिलाफ कार्रवाई को चुनौती देते हुए कहा गया कि राहुल गांधी के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए कोई पहली नजर में सबूत नहीं है और याचिकाकर्ता यह साबित करने के लिए कोई डॉक्यूमेंट्री सबूत पेश करने में नाकाम रहा है कि राहुल गांधी ने अपने ‘एक्स’ हैंडल पर ऐड सर्कुलेट किया था, सिवाय शिकायत में सिर्फ इस दलील के कि राहुल गांधी ने ऐड जारी करने के निर्देश दिए थे।

राहुल गांधी इस मामले के सिलसिले में बेंगलुरु में स्पेशल एमपी/एमएलए कोर्ट में पेश हुए थे। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी कोर्ट में पेश हुए थे और उन्होंने जमानत हासिल की थी। उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने इस मामले को ‘झूठा’ बताया था।

यह ध्यान देने वाली बात है कि कांग्रेस ने ’40 प्रतिशत कमीशन’ के आरोप को उस समय की सत्ताधारी भाजपा सरकार के खिलाफ एक बड़ा कैंपेन मुद्दा बनाया था। शुरुआत में, ये आरोप भाषणों में उठाए गए थे। बाद में पार्टी ने सोशल मीडिया कैंपेन शुरू किए और पूरे राज्य में पोस्टर लगाए।

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