कर्नाटक में विधानसभा कोटे की 7 विधान परिषद सीटों के लिए मतदान 18 जून को आयोजित किया जा रहा है। यह चुनाव राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें संख्याबल के साथ-साथ क्रॉस-वोटिंग और प्राथमिकता वोटों की रणनीति भी निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
मतदान की प्रक्रिया बेंगलुरु स्थित विधानसभा में सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगी। इसके बाद शाम 5 बजे से मतगणना शुरू की जाएगी। इस चुनाव में कुल 7 सीटों के लिए 8 उम्मीदवार मैदान में हैं।
मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ दलभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी और क्षेत्रीय दल जनता दल (सेक्युलर) के बीच है। कांग्रेस ने 5, भाजपा ने 2 और जेडी (एस) ने 1 उम्मीदवार उतारे हैं। वर्तमान संख्याबल के अनुसार कांग्रेस के पास 134 विधायक, भाजपा के पास 62 और जेडी (एस) के पास 18 विधायक हैं, जबकि कुछ सीटें अन्य और निर्दलीय विधायकों के पास हैं।
जीत सुनिश्चित करने के लिए किसी भी उम्मीदवार को पहली प्राथमिकता के कम से कम 28 वोटों की आवश्यकता होगी। मौजूदा स्थिति में कांग्रेस के लिए 4 सीटें और भाजपा के लिए 2 सीटें अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जा रही हैं, जबकि 7वीं सीट के लिए कड़ा मुकाबला होने की संभावना है। यह सीट कांग्रेस और भाजपा-जेडी (एस) गठबंधन के बीच निर्णायक जंग का केंद्र बन गई है।
इस चुनाव में क्रॉस-वोटिंग की आशंका ने दोनों ही खेमों की चिंता बढ़ा दी है। इसी कारण कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए उन्हें बिदादी स्थित वंडरला रिसॉर्ट में भेजकर प्रशिक्षण और रणनीतिक बैठकें आयोजित की हैं। वहीं भाजपा और जेडी(एस) ने भी अपने-अपने विधायकों को सुरक्षित स्थानों पर रखकर अनुशासन बनाए रखने की कोशिश की है।
लोगों को मानना है कि यह चुनाव केवल संख्याबल का नहीं, बल्कि रणनीति, एकजुटता और अंतिम समय में होने वाली राजनीतिक गतिविधियों का भी परीक्षण होगा। 7वीं सीट का परिणाम राज्य की राजनीतिक दिशा और भविष्य की गठबंधन रणनीतियों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।


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