केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने ओडिशा में एक ईसाई पादरी पर हुए क्रूर हमले की शुक्रवार को कड़ी निंदा की है। उन्होंने इस घटना को संघ परिवार द्वारा बढ़ावा दी जा रही हिंसा और नफरत के माहौल का हिस्सा बताया है।
घटना ओडिशा के ढेंकानाल जिले के पारजांग गांव में 4 जनवरी 2026 को हुई। पादरी बिपिन बिहारी नाइक अपनी पत्नी और कुछ अन्य लोगों के साथ एक निजी घर में प्रार्थना सभा कर रहे थे। तभी कथित तौर पर लगभग 15-40 लोगों की भीड़ ने घर में घुसकर आरोप लगाया कि पादरी जबरन धर्मांतरण करवा रहे हैं और हिंदू देवी-देवताओं का अपमान कर रहे हैं। भीड़ ने पादरी से बर्बरता की और गोबर खाने के लिए दबाव डालने की बात भी कही जा रही है।
पादरी की पत्नी बंधना नाइक ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। ओडिशा पुलिस ने 9 लोगों को हिरासत में लिया है, हालांकि प्रारंभिक जांच में पुलिस ने गोबर खाने की बात से इनकार किया है। मामला जबरन धर्मांतरण के आरोपों से जुड़ा बताया जा रहा है, और पादरी के खिलाफ भी काउंटर एफआईआर दर्ज हुई है।
पिनाराई विजयन ने अपनी पोस्ट में कहा कि यह घटना अकेली नहीं है, बल्कि पूरे देश में धर्मनिरपेक्षता पर हमले का हिस्सा है। उन्होंने ग्राहम स्टेन्स और उनके बच्चों की 2000 में हुई हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि असहिष्णुता की ताकतें आज भी सक्रिय हैं। उन्होंने भाजपा सरकारों की चुप्पी और मिलीभगत को जिम्मेदार ठहराया और संवैधानिक लोकतंत्र को बचाने के लिए मजबूत विरोध की अपील की।
इस घटना पर कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (सीबीसीआई) ने भी कड़ी निंदा की, इसे मानव गरिमा और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया। मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने भी इसे निंदनीय करार दिया।


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