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केरल : कांग्रेस के नए चुने गए विधायकों की गुरुवार को तिरुवनंतपुरम में होगी मीटिंग

Kerala: Newly elected Congress MLAs to meet in Thiruvananthapuram on Thursday

6 मई । केरल की राजनीति में गुरुवार का दिन बेहद अहम होने जा रहा है, जब कांग्रेस अपने नवनिर्वाचित विधायकों की पहली बैठक तिरुवनंतपुरम में करने जा रही है। इस बैठक में सबसे बड़ा मुद्दा मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर होगा।

राज्य कांग्रेस अध्यक्ष सनी जोसेफ ने जानकारी दी कि कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक गुरुवार सुबह 10:30 बजे पार्टी मुख्यालय में होगी। विधानसभा चुनाव में शानदार जीत के बाद यह बैठक औपचारिक रूप से नई सरकार गठन की प्रक्रिया की शुरुआत मानी जा रही है।

कांग्रेस को इस बार रिकॉर्ड 63 सीटें मिली हैं, जिससे पार्टी मजबूत स्थिति में है। हालांकि, मुख्यमंत्री पद के लिए कई दावेदार होने के कारण स्थिति थोड़ी जटिल बनी हुई है। इस पद की दौड़ में मुख्य रूप से तीन बड़े नाम सामने हैं, जिसमें वीडी सतीशन, रमेश चेन्निथला और केसी वेणुगोपाल के नाम शामिल हैं। तीनों नेताओं के पास पार्टी के भीतर अच्छा समर्थन है, जिससे मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है।

बीते कुछ दिनों में इस रेस ने और जोर पकड़ लिया है। अलग-अलग खेमे अपने-अपने नेताओं के समर्थन में माहौल बनाने में जुटे हैं। ऐसे में यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां विधायकों की राय सामने आएगी।

इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता मुकुल वासनिक और अजय माकन को पर्यवेक्षक बनाया गया है। उनका काम विधायकों की राय जानना और उसे पार्टी हाईकमान तक पहुंचाना होगा, जो अंत में मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला लेगा।

सूत्रों के मुताबिक, पर्यवेक्षक विधायकों से व्यक्तिगत तौर पर भी बातचीत कर सकते हैं, ताकि वे बिना किसी दबाव के अपनी राय रख सकें। इससे न सिर्फ संख्यात्मक समर्थन बल्कि हर दावेदार की स्वीकार्यता का भी आकलन किया जाएगा।

कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) करीब एक दशक बाद सत्ता में लौटा है। लेकिन मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर अभी तक स्पष्टता नहीं होने से थोड़ी अनिश्चितता बनी हुई है।

गुरुवार को होने वाली बैठक नेतृत्व तय करने की दिशा में पहला बड़ा कदम है। भले ही अंतिम फैसला तुरंत न आए, लेकिन इस बैठक से मिलने वाले संकेत आगे की दिशा तय करेंगे। अब सभी की नजरें इस पर हैं कि कांग्रेस अपनी जीत को कितनी जल्दी एकजुट नेतृत्व में बदल पाती है।

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