लोकसभा में बुधवार को केंद्रीय बजट 2026 पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता किया है और देश का विदेशी ताकतों के सामने ‘समर्पण’ कर दिया है। उनके इस बयान पर सत्ता पक्ष की ओर से जोरदार विरोध हुआ।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौता करते समय भारत के हितों को शर्मनाक तरीके से गिरवी रख दिया। उन्होंने इसे ‘नॉनसेंस’ कदम बताते हुए कहा कि सरकार ने कृषि, आईटी, डेटा और लोगों के हितों से जुड़े कई मामलों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुकाव दिखाया है।
उनके इस बयान पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताई। उन्होंने राहुल गांधी की टिप्पणियों को ‘बेतुका’ बताया और कहा कि आलोचना रचनात्मक होनी चाहिए। रिजिजू ने मांग की कि असंसदीय शब्दों को कार्यवाही से हटाया जाए। सदन की कार्यवाही देख रहे अध्यक्षीय पीठासीन सदस्य जगदंबिका पाल ने भी राहुल गांधी से आपत्तिजनक शब्दों से बचने को कहा। राहुल गांधी ने इसे स्वीकार किया, लेकिन सरकार को घेरना जारी रखा।
सदन में उस समय हंगामा और नारेबाजी शुरू हो गई जब विपक्षी सदस्यों ने राहुल के ‘सरेंडर’ वाले आरोप का समर्थन किया, जबकि सत्ता पक्ष के सदस्य उनका विरोध करते रहे। राहुल गांधी ने आगे कहा कि यह सरकार देश, किसानों, आईटी सेक्टर और ऊर्जा सुरक्षा को बेच चुकी है और अमेरिका के सामने पूरी तरह झुक गई है।
इस पर किरेन रिजिजू ने पलटवार करते हुए कहा, “कोई माई का लाल पैदा नहीं हुआ जो देश को बेच सके।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के अब तक के सबसे मजबूत नेता हैं।
राहुल गांधी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर भी निशाना साधते हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और विदेशी क्लाउड सेवा कंपनियों को कथित टैक्स छूट को देश के आर्थिक और रणनीतिक हितों के खिलाफ बताया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “वित्त मंत्री मुस्कुरा रही हैं, उन्हें मुस्कुराना पसंद है। बड़ी कंपनियों को 20 साल की टैक्स छुट्टी दे दी, क्या हमारे डेटा के साथ यही किया गया?”


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