बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू सोमवार को यहां सॉल्ट लेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों के सामने पेश हुआ। वह एक सिंडिकेट मामले के सिलसिले में महीनों से लापता था।
फरवरी माह में रबींद्र सरोवर घटना में उसका नाम आने के बाद से ही पुलिस उसे तलाश रही थी। वह समय-समय पर सोशल मीडिया पर लाइव आता रहता था, लेकिन उसका पता नहीं चल पा रहा था। ईडी ने भी सिंडिकेट मामले की जांच के सिलसिले में उसके घर पर छापा मारा था। हालांकि, सोमवार को सोना पप्पू अचानक ईडी दफ्तर में पेश हो गया। पप्पू ने दावा किया कि उसने कुछ भी गलत नहीं किया है।
ईडी दफ्तर में घुसते समय पप्पू से पूछा गया कि क्या उसे गिरफ्तार होने का डर है। जवाब में, उसने कहा कि मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है। पप्पू का नाम रबींद्र सरोवर झड़प में आया है, जो फरवरी में दो गुटों के बीच हुई थी। ईडी ने पिछले अप्रैल में उसके घर की तलाशी ली थी और करीब 2 करोड़ रुपये बरामद किए थे। इसके अलावा, पप्पू के घर से एक महंगी कार और संपत्ति के कई दस्तावेज भी जब्त किए गए थे।
ईडी सूत्रों ने बताया कि पप्पू के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज की गई हैं। उस पर रंगदारी, जमीन पर कब्जा और धमकी देने जैसे कई आरोप हैं। ईडी के अनुसार, पप्पू दक्षिण कोलकाता के कस्बा और बालीगंज इलाकों में कई सिंडिकेट चलाता है।
उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत भी एक मामला दर्ज है। ईडी ने ऐसे कई आरोपों के बाद जांच शुरू की थी। केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों ने इस मामले में कंस्ट्रक्शन कारोबारी जॉय कामदार को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में मिली जानकारी के आधार पर ईडी ने पिछले महीने फर्न रोड पर कोलकाता पुलिस के अधिकारी शांतनु सिन्हा बिस्वास के घर पर छापा मारा था। शांतनु को पप्पू मामले में पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया था। बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
चूंकि पप्पू लंबे समय से नहीं मिल रहा था, इसलिए जांचकर्ताओं को लगा कि वह किसी दूसरे राज्य में जाकर छिप गया है। जांचकर्ताओं का मानना है कि जब पप्पू छिपा हुआ था, तब उसे हवाला के जरिए पैसे भेजे गए होंगे। अब यह देखना बाकी है कि सिंडिकेट मामले में उसकी गिरफ्तारी होती है या नहीं।

