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‘शोहरत के बीच भी अकेलापन’, शुभांगी अत्रे ने सोशल मीडिया और रिश्तों पर रखे विचार

'Loneliness amidst fame': Shubhangi Atre shares her thoughts on social media and relationships.

टीवी इंडस्ट्री में लंबे समय से काम कर रहीं शुभांगी अत्रे ने आईएएनएस संग बातचीत में अकेलेपन और रिश्तों की सच्चाई को लेकर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि यह अकेलापन सिर्फ भीड़ या लोगों की कमी से नहीं होता, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव और बातचीत की कमी से होता है।

आईएएनएस से बात करते हुए शुभांगी अत्रे ने कहा, ”मैं खुद को सौभाग्यशाली मानती हूं, क्योंकि मेरी जिंदगी में कुछ ऐसे लोग हैं, जो सच में मुझसे पूछते हैं, ‘आप कैसी हैं?’ और जवाब का इंतजार भी करते हैं। किसी इंसान के लिए सबसे बड़ा सुकून यही होता है कि कोई उसे बिना टोके, बिना जज किए ध्यान से सुने। कई बार सलाह से ज्यादा राहत सिर्फ सुन लिए जाने से मिलती है।”

उन्होंने आगे कहा, “अकेलापन अक्सर इस वजह से महसूस होता है क्योंकि लोगों के बीच बातचीत तो होती है, लेकिन वह गहराई नहीं होती, जो दिल को छू सके। आजकल लोग एक-दूसरे से जुड़े तो रहते हैं, लेकिन बातचीत अक्सर सतही रह जाती है। ऐसे में इंसान भीड़ में रहते हुए भी खुद को अकेला महसूस कर सकता है। मेरा मानना है कि एक खुली बातचीत, जिसमें व्यक्ति अपने असली विचार और भावनाएं बिना डर के रख सके, वह कई रिश्तों से ज्यादा कीमती होती है।”

सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर बात करते हुए उन्होंने कहा, ”आज के समय में लोग एक-दूसरे की जिंदगी से तो वाकिफ रहते हैं, लेकिन उनकी भावनाओं से नहीं। हम यह तो देख लेते हैं कि सामने वाला क्या कर रहा है, कहां घूम रहा है या क्या पोस्ट कर रहा है, लेकिन यह नहीं जान पाते कि वह अंदर से क्या महसूस कर रहा है। सोशल मीडिया ने लोगों को ज्यादा विजिबल बना दिया है, लेकिन महसूस करने और समझने वाली गहराई कम हो गई है। असली बातचीत अभी भी स्क्रीन से दूर ही होती है।”

रिश्तों को लेकर उन्होंने कहा, ”आज के समय में सच्चे और भरोसेमंद रिश्ते बनाना आसान नहीं है। भरोसा, समझ और अपनापन धीरे-धीरे बनता है और इसके लिए समय और धैर्य दोनों की जरूरत होती है। जीवन में वही लोग सबसे अहम होते हैं जो अच्छे और बुरे दोनों समय में साथ खड़े रहते हैं। ऐसे रिश्ते ही इंसान को मानसिक रूप से मजबूत बनाते हैं और अकेलेपन को दूर करते हैं।”

उन्होंने निजी जिंदगी के बारे में बात करते हुए कहा, ”मेरी बेटी आशी मेरे जीवन का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। वह 19 साल की हैं और काफी समझदार हैं। वह हमेशा मेरा हालचाल लेती रहती हैं और मेरा ख्याल रखती हैं। मेरे कुछ करीबी लोग भी हैं जिनके कारण मुझे अकेलापन महसूस नहीं होता।”

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