October 10, 2026
National

मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने ओबीसी की पीठ में छुरा घोंपा कांग्रेस

मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को लेकर आए जबलपुर उच्च न्यायालय के फैसले को लेकर कांग्रेस ने राज्य की भाजपा सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि राज्य सरकार ने ओबीसी की पीठ में छुरा घोंपने का काम किया है। दरअसल राज्य में ओबीसी को 14 से बढ़कर 27 आरक्षण दिए जाने का मामला जबलपुर उच्च न्यायालय में लंबित था। इस मामले पर शुक्रवार को न्यायालय की दो जजों की खंडपीठ ने अपना फैसला सुनाया।

इस फैसले के मुताबिक ओबीसी को 14 फीसदी आरक्षण ही मिलेगा। आरक्षण बढ़ाने का अध्यादेश तत्कालीन कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने लाया था। जबलपुर उच्च न्यायालय के फैसले के बाद राज्य की सियासत गरमाई हुई है। भाजपा जहां कांग्रेस के अध्यादेश पर ही सवाल उठा रही है, वहीं कांग्रेस राज्य सरकार पर हमलावर है।

विधानसभा में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कांग्रेस मुख्यालय भोपाल में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया और सरकार की पहल पर सवाल उठाए । उन्होंने कहा कि न्यायालय के आए फैसले से प्रदेश की 50 प्रतिशत से अधिक आबादी वाले ओबीसी समाज की उम्मीदों को झटका लगा है।

उन्होंने बताया कि समाज को उम्मीद थी कि 27 प्रतिशत आरक्षण से बच्चों को शिक्षा और रोजगार में नए अवसर मिलेंगे। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि अदालत ने कानून और साक्ष्यों के आधार पर निर्णय दिया, लेकिन सरकार की जिम्मेदारी थी कि वह अपने पक्ष में मजबूत और विश्वसनीय तथ्य प्रस्तुत करे।

हाईकोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की 1996–97 और 2019–20 की सिफारिशें 1983 की महाजन आयोग रिपोर्ट पर आधारित थीं। अदालत ने पाया कि इन सिफारिशों के लिए इस उद्देश्य से नए आंकड़े एकत्र नहीं किए गए थे।

नेता प्रतिपक्ष ने राज्य सरकार से सवाल किया है कि 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के समर्थन में सरकार ने नए, व्यापक और विश्वसनीय आंकड़े क्यों नहीं जुटाए? कांग्रेस नेताओं का कहना है कि एक तरफ जहां केंद्र सरकार वोट चोरी कर रही है तो वही मध्य प्रदेश की सरकार ने ओबीसी आरक्षण की चोरी की है।

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