N1Live National मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव बोले-पीएम के आह्वान से जल संरक्षण अभियान को मिली नई ऊर्जा, जताया आभार
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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव बोले-पीएम के आह्वान से जल संरक्षण अभियान को मिली नई ऊर्जा, जताया आभार

Madhya Pradesh Chief Minister Mohan Yadav stated that the water conservation campaign received new momentum from the PM's call and expressed his gratitude.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को कहा कि उन्होंने निवाड़ी जिले के पर्यटन एवं धार्मिक स्थल ओरछा स्थित कंचना घाट पर स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 136वें संस्करण को सुना।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि प्रधानमंत्री ने ‘कैच द रेन’ अभियान को जन आंदोलन बनाने, विक्रम-1 के सफल प्रक्षेपण के जरिए अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ते कदम तथा देश के खिलाड़ियों के प्रेरणादायी प्रदर्शन का उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री के आह्वान से प्रेरित होकर मध्य प्रदेश में लगातार तीसरे वर्ष ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इन प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव 4 जुलाई से शुरू हुए ‘कैच द रेन’ अभियान में भी दिखाई देगा।

अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने मध्य प्रदेश के सीधी जिले में जनभागीदारी से किए जा रहे जल संरक्षण कार्यों की विशेष सराहना की। मुख्यमंत्री मोहन यादव के मार्गदर्शन में संचालित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत सीधी जिले में जल संरक्षण को विकास और आजीविका से जोड़ने की दिशा में व्यापक कार्य किए गए हैं।

अभियान के अंतर्गत जिले में 1,489 खेत तालाब बनाए गए हैं। इनसे वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और सिंचाई क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे कृषि के लिए जल उपलब्धता अधिक सुनिश्चित हुई है।

रविवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सीधी जिले में अब तक 12,983 जल संरक्षण कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इसके परिणामस्वरूप जिले की जल भंडारण क्षमता 13,573,874 घन मीटर से बढ़कर 18,056,486 घन मीटर हो गई है, यानी 4,482,612 घन मीटर की वृद्धि हुई है। इस अतिरिक्त क्षमता से लगभग 896 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि की सिंचाई की जा सकती है तथा करीब एक लाख लोगों की दैनिक जल आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकता है।

सीधी जिले ने जल संरक्षण को आजीविका का माध्यम भी बनाया है। वर्तमान में 211 तालाबों में मत्स्य पालन और 178 तालाबों में सिंघाड़े की खेती की जा रही है। इन गतिविधियों से मछुआरा समूहों, स्वयं सहायता समूहों और व्यक्तिगत किसानों को प्रत्यक्ष रूप से लगभग 80 लाख रुपये का आर्थिक लाभ हुआ है।

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