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मध्य प्रदेश में कृषि वर्ष नहीं, बल्कि ठेकेदारी और कमीशन वर्ष: जीतू पटवारी

Madhya Pradesh is not an agricultural year, but a year of contracting and commission: Jitu Patwari

कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य के जल संसाधन विभाग की सिंचाई परियोजनाओं के टेंडर सहित अन्य मामलों में बड़ी गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में वर्ष 2026 कृषि वर्ष नहीं है, बल्कि यह ठेकेदारी और कमीशन बाजी का वर्ष बन गया है।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पटवारी ने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि एक तरफ सरकार लगातार कर्ज ले रही है, वहीं दूसरी ओर बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हो रही हैं। प्रदेश सरकार ने इस वर्ष को ‘कृषि वर्ष’ घोषित किया है, लेकिन वास्तविकता यह है कि सिंचाई परियोजनाएं ठप पड़ी हैं और किसान पानी के लिए परेशान हैं। यदि सिंचाई परियोजनाओं की यही स्थिति है तो सवाल उठता है कि यह कृषि वर्ष है या ठेकेदारी और कमीशन का वर्ष।

पटवारी ने बताया कि जल संसाधन विभाग में टेंडर प्रक्रिया पर गिनी-चुनी कंपनियों का कब्जा है। कई बड़े टेंडरों में बार-बार वही कंपनियां दिखाई देती हैं। इससे यह आशंका गहराती है कि टेंडर प्रक्रिया को सीमित कंपनियों के बीच ही बांट दिया गया है और देश की अन्य कंपनियों को अवसर नहीं मिल रहा।

उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े टेंडरों में लगातार दो कंपनियों के नाम सामने आते हैं। आखिर सरकार इन कंपनियों पर इतनी मेहरबान क्यों है कि लगभग हर बड़े टेंडर में यही कंपनियां सामने आती हैं? इतना ही नहीं, विभागीय गतिविधियों में कुछ नाम की भूमिका खास रहती है, जबकि वह कोई सरकारी अधिकारी नहीं है। कहा यह जा रहा है कि इन व्यक्तियों की भूमिका उन कंपनियों में महत्वपूर्ण है जिनके नाम टेंडर हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इस पूरे नेटवर्क के कुछ लोगों के दुबई में व्यापारिक संबंध होने की भी जानकारी सामने आई है। यदि यह सही है तो यह मामला सिर्फ ठेकेदारी का नहीं बल्कि वित्तीय नेटवर्क और संभावित मनी ट्रेल का भी विषय है, जिसकी गंभीर जांच होना आवश्यक है। पटवारी ने सिंचाई परियोजनाओं में तकनीकी अनियमितताओं का भी मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा कि शिकायतें मिली हैं कि कुछ परियोजनाओं में जमीन पर सस्ते पाइप और कागजों में महंगे पाइप का भुगतान लिया गया। यदि यह सही है, तो यह न केवल वित्तीय भ्रष्टाचार है बल्कि किसानों के साथ तकनीकी धोखाधड़ी भी है।

उन्होंने कहा कि अब एक नया और बेहद गंभीर मुद्दा सामने आया है, फर्जी बैंक गारंटी का। हाल ही में जल निगम में फर्जी बैंक गारंटी का मामला सामने आने के बाद 9 दिसंबर 2024 को वहां इलेक्ट्रॉनिक बैंक गारंटी लागू करने का आदेश जारी किया गया था। इसके बावजूद आज तक जल संसाधन एवं एनवीडीए विभाग में यह व्यवस्था लागू नहीं की गई है।

पटवारी ने आरोप लगाया कि कई कंपनियां फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर टेंडर हासिल कर एडवांस भुगतान निकाल रही हैं और काम में देरी कर रही हैं। यदि विभाग में जमा सभी बैंक गारंटियों की जांच कर ली जाए तो कई बड़े ठेकेदार और उनके संरक्षणकर्ता अधिकारियों-नेताओं के नाम सामने आ सकते हैं।

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