April 23, 2026
Entertainment

राम गोपाल वर्मा की तीन साल पुरानी तलाश मनोज बाजपेयी, पहली मुलाकात से बदली किस्मत

Manoj Bajpayee was a three-year-old search for Ram Gopal Varma, but his first meeting changed his fortunes.

23 अप्रैल । हिंदी सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं, जो अपने चेहरे से नहीं, बल्कि एक्टिंग से लोगों के दिलों में जगह बनाते हैं। मनोज बाजपेयी उन्हीं कलाकारों में से एक हैं। आज उन्हें बॉलीवुड का सबसे दमदार और बेहतरीन अभिनेता माना जाता है, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं था। एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें काम नहीं मिल रहा था। उसी दौर में एक ऐसी मुलाकात हुई, जिसने उनकी जिंदगी बदल दी।

23 अप्रैल 1969 को बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बेलवा गांव में जन्मे मनोज बाजपेयी एक साधारण किसान परिवार से आते हैं। उनके पिता खेती करते थे और मां घर संभालती थीं। बचपन से ही मनोज का सपना अभिनेता बनने का था। वह फिल्म के बेहद शौकीन थे। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव और बिहार में पूरी की। इसके बाद वह अपने सपनों को पूरा करने के लिए दिल्ली चले आए।

दिल्ली में उन्होंने थिएटर की दुनिया में कदम रखा। उनका सपना था कि उन्हें नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में एडमिशन मिल जाए, लेकिन उन्हें लगातार तीन बार रिजेक्ट कर दिया गया। यह दौर उनके लिए बेहद मुश्किल था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने थिएटर करना जारी रखा और धीरे-धीरे दिल्ली के रंगमंच में अपनी पहचान बनाने लगे।

थिएटर में नाम कमाने के बाद मनोज मुंबई पहुंचे। यहां उनका संघर्ष और बढ़ गया। शुरूआत में उन्हें छोटे-छोटे रोल मिलते थे और कभी-कभी काम ही नहीं होता था। इसी दौरान उन्होंने फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ में काम किया। फिल्म में उनका किरदार छोटा था और लुक इतना बदला हुआ था कि लोग उन्हें पहचान ही नहीं पाए।

इसी फिल्म ने उनकी जिंदगी बदलने की राह तैयार की। एक दिन मनोज निर्देशक राम गोपाल वर्मा से मिलने पहुंचे। उस समय राम गोपाल वर्मा फिल्म ‘दौड़’ के लिए कलाकार तलाश रहे थे। जैसे ही उन्हें पता चला कि मनोज वही अभिनेता हैं, जिसने ‘बैंडिट क्वीन’ में काम किया था, वह अपनी सीट से खड़े हो गए। उन्होंने मनोज से कहा कि वह उन्हें पिछले तीन सालों से ढूंढ रहे थे। राम गोपाल वर्मा उनकी एक्टिंग से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने तुरंत उन्हें अपनी फिल्म में काम देने का फैसला किया।

हालांकि, शुरुआत में उन्हें छोटा रोल मिला, लेकिन राम गोपाल वर्मा ने मनोज से वादा किया कि वह अगली फिल्म में उन्हें बड़ा मौका देंगे। यही वादा उन्होंने फिल्म ‘सत्या’ के रूप में पूरा किया। इस फिल्म में मनोज ने भीखू म्हात्रे का किरदार निभाया और रातोंरात स्टार बन गए। उनका डायलॉग ‘मुंबई का किंग कौन? भीखू म्हात्रे’ आज भी लोगों की जुबान पर है। इस फिल्म के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला और बॉलीवुड में उनकी अलग पहचान बन गई।

इसके बाद मनोज बाजपेयी ने कई शानदार फिल्मों में काम किया। ‘शूल’, ‘पिंजर’, ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’, ‘अलीगढ़’ और ‘भोंसले’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को खूब सराहा गया। उन्हें कई राष्ट्रीय पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कार मिल चुके हैं। भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से भी सम्मानित किया।

फिल्मों के साथ-साथ उन्होंने ओटीटी पर भी अपनी अलग पहचान बनाई। ‘द फैमिली मैन’ में निभाए गए उनके किरदार को लोगों ने बेहद पसंद किया। आज भी मनोज बाजपेयी अपनी शानदार एक्टिंग से दर्शकों का दिल जीत रहे हैं।

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