October 14, 2026
National

मां कूष्माण्डा की असीम ऊर्जा से सुख-समृद्धि एवं आरोग्य का संचार हो: नवरात्र के चौथे दिन पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को शारदीय नवरात्र के चौथे दिन लोगों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने मां कूष्माण्डा की पूजा-अर्चना की और सभी के लिए नई उम्मीद, खुशी, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पोस्ट में कहा, “नवरात्रि में आज देवी माता के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा का विधान है। उनकी असीम ऊर्जा से समस्त देशवासियों के जीवन में नई आशा, सुख-समृद्धि एवं आरोग्य का संचार हो।”

इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने सुभाषित में श्रीदुर्गासप्तशती का संस्कृत श्लोक “सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥” साझा किया है। इस श्लोक का हिंदी अर्थ है, “हे मां नारायणी! आप समस्त मंगलों में परम मंगलमयी हैं। आप कल्याणस्वरूपा हैं तथा समस्त पुरुषार्थों और मनोरथों को सिद्ध करने वाली हैं। आप शरणागतों की रक्षा करने वाली, त्रिनेत्रधारिणी एवं गौरवर्णा मां गौरी हैं। हे जगज्जननी! आपको मेरा सादर नमन है।”

प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए श्लोक को विशेष रूप से नवरात्र और देवी उपासना के पावन अवसरों पर श्रद्धा और भक्ति के साथ उच्चारित किया जाता है। इसके नियमित जप से मां दुर्गा की असीम कृपा, आशीर्वाद और दिव्य संरक्षण प्राप्त होते हैं, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार होता है।

बता दें कि दुर्गा सप्तशती को ‘देवी माहात्म्य’ या ‘चंडी पाठ’ भी कहा जाता है। यह मार्कंडेय पुराण का एक भाग है, जिसकी रचना महर्षि वेदव्यास ने की है। इस ग्रंथ में 13 अध्याय और 700 श्लोक हैं। ‘सप्त’ का अर्थ है ‘सात’ और ‘शत’ का अर्थ है ‘सौ’, इसलिए ‘सप्तशती’ कहा जाता है। इस ग्रंथ में महिषासुर जैसे राक्षसों पर दुर्गा की विजय का वर्णन है। सही पाठ के लिए विशिष्ट विधि का पालन किया जाता है, जिसमें त्र्यंगम और नवांगम शामिल हैं, जिनका नवरात्र के दौरान या एक, तीन या सात बैठकों में श्रद्धापूर्वक पाठ किया जाता है।

धार्मिक मान्यता मान्यता है कि दुर्गा सप्तशती का प्रतिदिन या नवरात्रि के दौरान पाठ करने से अनेक आध्यात्मिक और व्यक्तिगत लाभ प्राप्त होते हैं। दुर्गा सप्तशती का पाठ विधि-विधान और शुद्धता के साथ करना चाहिए। आप इसे नवरात्र या किसी अन्य शुभ अवसर पर एक दिन में या नौ दिनों में पूरा कर सकते हैं। दुर्गा सप्तशती का सही पाठ करने के लिए एक पारंपरिक पाठ विधि का पालन करना आवश्यक है।

Leave feedback about this

  • Service