उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री असीम अरुण त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि वह उनके बैचमेट और एक काबिल इंसान थे। असीम अरुण ने कहा, “अनुराग डीजीपी त्रिपुरा के पद पर काम कर रहे थे। जब उनकी मृत्यु की जानकारी हुई तो बिल्कुल भी विश्वास नहीं हुआ। हम लोग उनके आवास पर एकत्रित हुए हैं, हम लोग उनके अंतिम संस्कार में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि अनुराग मेरे बैचमेट थे। हम लोग केवल साथ काम ही नहीं करते थे, बल्कि साथ रहते भी थे। उनके जैसा योद्धा कम होता है।”
उन्होंने कहा, “सभी को पता है कि 1984 के दंगों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश से एक एसआईटी का गठन किया गया था। अनुराग इस एसआईटी को लीड कर रहे थे। शायद ही ऐसा कोई उदाहरण हो, जहां सुप्रीम कोर्ट की ओर से नाम लेकर कहा गया था कि सीबीआई में कार्यकाल पूरा होने के बाद वे इस जांच में रहेंगे और इस केस को वे ही देखेंगे। इससे बड़ी गौरव और विश्वास की बात और क्या हो सकती है? अनुराग ने इस केस को पूरा किया और सजाएं भी दिलाईं। उनके जैसा व्यक्ति मैंने दूसरा नहीं देखा है।”
असीम अरुण ने आगे कहा, “इस घटना क्रम के बारे में हम सब और गहराई से जानना चाहते हैं। मुझे जानकारी हुई है कि इस मामले में जांच का आदेश दिया जा रहा है। मुझे विश्वास है कि त्रिपुरा की सरकार इस मामले को गंभीरता से लेगी। हम सभी मित्रों और परिवार के लिए दुख की घड़ी है।” उन्होंने आगे कहा कि अभी कोई पुख्ता जानकारी तो सामने नहीं आई है। लेकिन हम सभी मित्र और परिवार के सदस्य घटनाक्रम को जरूर जानन चाहेंगे। मुझे विश्वास है कि इस मामले में त्रिपुरा सरकार और पुलिस की ओर से की जाएगी।
बता दें कि 20 जुलाई को त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग, राज्य पुलिस मुख्यालय में अपने चैंबर से जुड़े बाथरूम में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए थे। उनको अगरतला के सरकारी मेडिकल कॉलेज और गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल ले जाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। मंगलवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनको अंतिम विदाई दी गई। त्रिपुरा सरकार ने उनके सम्मान में मंगलवार को एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की थी।

