August 7, 2026
Sports

मीराबाई चानू: बचपन में उठाए लकड़ियों के गठ्ठर, ट्रक ड्राइवरों से लेनी पड़ी लिफ्ट, कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड की हैट्रिक लगातार रचा इतिहास

Mirabai Chanu: Carried bundles of firewood in childhood, had to hitch rides with truck drivers, and made history by achieving a hat-trick of gold medals at the Commonwealth Games.

 

नई दिल्लीकहते हैं कि जिंदगी का दूसरा नाम ही संघर्ष है। भारत के महिला वेटफिल्टर मीराबाई चानू शायद इस बात को बखूबी जानती और मानती भी हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में तीन गोल्ड मेडल जीतने वालीं दुनिया की इकलौती वेटलिफ्टर मीराबाई के लिए जिंदगी कभी आसान नहीं रही, हालांकि उन्होंने हर कदम और हर मोड़ पर संघर्ष का दामन थामे रखा और हर विपरीत परिस्थिति से निकलकर विश्वभर में अपने खेल के दम पर अलग पहचान बनाई।

मीराबाई चानू का जन्म 8 अगस्त, 1994 को मणिपुर के इंफाल के पास स्थित नोंगपोक काकचिंग में हुआ। मीराबाई एक साधारण परिवार से आती थीं, तो आर्थिक तंगी और शुरुआती जीवन संघर्ष से भरा रहा, हालांकि भारतीय महिला वेटलिफ्टर के अंदर बचपन से ही असाधरण शारीरिक क्षमता थी। वह लकड़ियों के भारी गठ्ठर उठाया करती थीं। वह इन गठ्ठर को उठाकर पहाड़ियों पर भी चढ़ा करती थीं। मीराबाई के परिवार का किसी भी खेल से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था, हालांकि बेटी की क्षमता को देखते हुए माता-पिता ने हमेशा मीराबाई को सपोर्ट किया।

मीराबाई की दिलचस्पी पहले तीरंदाजी में थी, लेकिन इंफाल के भारतीय खेल प्राधिकरण केंद्र में वेटलिफ्टिंग की ट्रेनिंग को देखकर इस खेल के प्रति मीराबाई की दिलचस्पी बढ़ी। उन्होंने जल्द ही इस खेल में अपना करियर बनाने की ठान ली। घरेलू प्रतियोगिताओं में मीराबाई की प्रतिभा का हर कोई कायल हो गया। मीराबाई ने साल 2008 में मणिपुर स्पोर्ट्स अकादमी में अपनी ट्रेनिंग शुरू की। घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण उन्हें अकादमी तक पहुंचने के लिए रास्ते में बालू और पत्थर लेकर जाने वाले ट्रक ड्राइवरों से लिफ्ट मांगनी पड़ती थी।

नेशनल गेम्स में शानदार प्रदर्शन करने के बाद मीराबाई चानू ने साल 2014 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना डेब्यू किया। मीराबाई का डेब्यू शानदार रहा और उन्होंने 48 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल अपने नाम किया, हालांकि यह उनके शानदार करियर की महज शुरुआत मात्र थी। साल 2017 में विश्व वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में मीराबाई गोल्ड मेडल जीतने में सफल रहीं। वह दो दशकों में यह गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय वेटलिफ्टर बनीं।

इसके बाद साल 2018 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में मीराबाई का दमदार प्रदर्शन देखने को मिला और उन्होंने गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। वहीं, 2021 में टोक्यो ओलंपिक में भी भारतीय महिला वेटलिफ्टर का जलवा देखने को मिला और उन्होंने 49 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल जीता। वह ओलंपिक में सिल्वर जीतने वालीं पहली भारतीय वेटलिफ्टर बनीं। 2022 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में मीराबाई चानू अपना दबदबा कायम रखने में सफल रहीं और उन्होंने लगातार दूसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल अपने नाम किया।

हालांकि पेरिस ओलंपिक में जरूर मीरीबाई चानू के हाथ निराशा लगी और वह मेडल जीतने से चूक गईं। मगर कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मीराबाई ने शानदार वापसी की और वह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में लगातार तीन गोल्ड मेडल जीतने वाली दुनिया की पहली वेटलिफ्टर बनीं। उन्होंने 48 किलोग्राम वर्ग में 190 किलो का भार उठाते हुए गोल्ड जीता। मीराबाई को साल 2018 में सरकार द्वारा ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया गया। इसी साल वेटलिफ्टिंग में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन के चलते उन्हें मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से भी नवाजा गया।

 

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