July 29, 2026
Punjab

भगवंत मान सरकार के अभियान ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ में माताएँ, पत्नियाँ और बहनें बन रही हैं सबसे बड़ी ताक़त

Under the Bhagwant Mann government’s ‘Chief Minister Health Scheme’, cashless treatment for respiratory ailments was provided to 14,032 patients over six months, covering treatment costs worth ₹37.30 crore.

अनिल भारद्वाज

चंडीगढ़ 26 जुलाई | भगवंत मान सरकार के ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान में महिलाएँ उम्मीद और बदलाव की सबसे बड़ी वाहक बनकर उभर रही हैं। हाल ही में मोगा में आयोजित एक जागरूकता कार्यक्रम ने पूरे पंजाब में गूँज रहे एक महत्त्वपूर्ण संदेश को सामने रखा कि माताएँ ,पत्नियाँ, बहनें और परिवार की अन्य महिलाएँ अपने प्रियजनों को उपचार और सामान्य जीवन में वापसी के लिए प्रेरित कर नशे के ख़िलाफ़ इस लड़ाई की अगुवाई कर रही हैं।

जब कोई परिवार नशे की चपेट में आता है, तो उसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव महिलाओं और बच्चों को झेलना पड़ता है। आर्थिक और मानसिक परेशानियों से लेकर घरेलू हिंसा के बढ़ते ख़तरे तक, नशा परिवारों को भीतर से तबाह कर देता है। लेकिन अब पंजाब में परिवार नशे को एक बीमारी के रूप में स्वीकार कर रहे हैं, अपने प्रियजनों को इलाज के लिए प्रेरित कर रहे हैं, उनके स्वस्थ होने की प्रक्रिया में साथ दे रहे हैं और उन्हें दोबारा नशे की गिरफ़्त में जाने से बचाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

नशे से मुक्ति की इस प्रक्रिया में महिलाएँ प्रेरक, देखभाल करने वाली और मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हुए सबसे बड़ी शक्ति बनकर सामने आ रही हैं। इतना ही नहीं, वे अपने आसपास के लोगों और रिश्तेदारों को भी नशा मुक्ति उपचार के लिए प्रेरित कर रही हैं, ताकि वे भी सम्मानजनक जीवन की ओर लौट सकें।

इन्हीं अनुभवों और प्रेरक कहानियों की गूँज एसएफसी कॉलेज, जलालाबाद में आयोजित “मेनेस ऑफ़ सब्सटांस अब्यूज़- अनकवरिंग द बर्डन ऑन वुमेन”(मादक पदार्थों का दुष्प्रभाव—महिलाओं पर पड़ने वाले बोझ को समझना) विषयक कार्यक्रम में सुनाई दी। इस कार्यक्रम में नशे से उबर चुके लोगों और उनके परिवारों की महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए तथा बताया कि कैसे उनके साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प ने उनके परिवार के सदस्यों को नशे की अंधेरी दुनिया से निकालकर सम्मानपूर्ण जीवन की ओर लौटाया।

लुधियाना की रागिनी कौर ने बताया, “मेरे पति शादी से पहले ही नशे के आदी थे, लेकिन मुझे इसका पता शादी के बाद साथ रहने पर चला। हमने लगभग उम्मीद छोड़ दी थी, तभी किसी ने हमें उन्हें नशा मुक्ति एवं रिहैबिलिटेशन केंद्र ले जाने की सलाह दी। वहाँ इलाज से उन्हें बहुत लाभ हुआ। आज वे पूरी तरह नशामुक्त हैं। मेरे पति के पूरी तरह नशा मुक्त होने के बाद हमने अपने मामा के बेटे को भी उसी केंद्र में इलाज के लिए भेजा और वह भी सफलतापूर्वक नशे से बाहर आ गया।”

मोगा के गाँव बुट्टर कलां की बलविंदर कौर ने भी अपने पति के नशे से बाहर आने की कहानी साझा की। उन्होंने कहा, “नशे ने हमारे परिवार को मानसिक और आर्थिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया था। काउंसलिंग के दौरान हमें समझाया गया कि नशे से मुक्ति एक ऐसी यात्रा है, जिसमें पूरे परिवार की भूमिका होती है। मैं अपने पति को नशा मुक्ति केंद्र लेकर गई। आज वे पूरी तरह नशामुक्त हैं। इतना ही नहीं, हमारे पड़ोस का एक युवक, जो हेरोइन का आदी था, वह भी सफलतापूर्वक नशे से बाहर आ चुका है।”

नशे के विरुद्ध ऐसी प्रेरणादायक सफलताएँ इस बात को और मज़बूत करती हैं कि पंजाब की नशा मुक्ति रणनीति में परिवारों, विशेषकर महिलाओं, को केंद्र में रखना कितना आवश्यक है। नशे के ख़िलाफ़ महिलाओं की इस महत्त्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में प्रत्येक मरीज़ के उपचार की प्रक्रिया में पारिवारिक काउंसलिंग को एक अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए।

लुधियाना के ज़िला नोडल मनोचिकित्सक डॉ. अरविंद गोयल ने भी इस विचार का समर्थन करते हुए कहा, “मादक पदार्थों की लत से मुक्ति सबसे अधिक सफल तब होती है, जब उपचार के साथ परिवार का मज़बूत सहयोग भी मिले। राज्य सरकार ने जहाँ पूरे पंजाब में निःशुल्क उपचार, परामर्श और रिहैबिलिटेशन सेवाओं को सुदृढ़ किया है, वहीं परिवार के सदस्यों की भागीदारी भी उतनी ही महत्त्वपूर्ण है। परिवार भावनात्मक संबल देता है, उपचार को नियमित रूप से जारी रखने के लिए प्रेरित करता है, कठिन परिस्थितियों से उबरने में मदद करता है और ऐसा वातावरण तैयार करता है, जिससे व्यक्ति लंबे समय तक नशामुक्त जीवन जी सके। अनेक मामलों में हमने देखा है कि माताएँ , पत्नियाँ और बहनें लोगों को नशामुक्ति की राह पर बनाए रखने में निर्णायक भूमिका निभाती हैं। नशामुक्ति एक सामूहिक प्रयास है, जिसमें परिवार जीवन को दोबारा सँवारने में सबसे प्रभावी सहायक साबित होता है।”

पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “हर सफल नशा मुक्ति के पीछे एक परिवार, एक समुदाय और ऐसी सरकारी व्यवस्था होती है, जो उम्मीद और संवेदनशीलता को प्राथमिकता देती है। माताएँ , पत्नियाँ और बहनें स्वस्थ, नशामुक्त और रंगला पंजाब की दिशा में बदलाव की मशालवाहक बन रही हैं। भगवंत मान सरकार के ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान की सबसे बड़ी सफलता यही है कि इसने नशे के ख़िलाफ़ लड़ाई को जन-आंदोलन का रूप दिया है और हम इस बदलाव का नेतृत्व कर रही महिलाओं की आवाज़ को आगे भी केंद्र में रखते रहेंगे।”

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