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असम में शांति के साथ मनाया गया मुहर्रम, कई जिलों में दिखी सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल

Muharram observed peacefully in Assam; examples of communal harmony witnessed in several districts.

असम में शुक्रवार को मुहर्रम पूरे धार्मिक श्रद्धा, शोक और शांति के साथ मनाया गया। राज्य के कई जिलों में ताजिया जुलूस, नमाज और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान अलग-अलग धर्मों के लोगों की भागीदारी ने राज्य की सांप्रदायिक सौहार्द की परंपरा को एक बार फिर मजबूत किया।

तिनसुकिया जिले के मार्गेरिटा कस्बे में मुहर्रम का प्रमुख आयोजन सेंट्रल मार्घेरिटा ईदगाह मैदान में हुआ, जिसे इस अवसर पर विशेष रूप से सजाया गया था। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल हुए। मुहर्रम के मुख्य आकर्षण के रूप में भव्य ताजिया जुलूस निकाला गया। यह जुलूस ईदगाह मैदान से शुरू होकर राष्ट्रीय राजमार्ग-315 से होते हुए शहर के विभिन्न हिस्सों से गुजरा।

इस जुलूस में मुस्लिम समुदाय के अलावा अन्य धर्मों के लोगों ने भी हिस्सा लिया, जिससे भाईचारे और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की भावना देखने को मिली। जुलूस में शामिल लोगों ने विश्व शांति, सांप्रदायिक सौहार्द और समृद्धि के लिए दुआ की। अलग-अलग जाति, समुदाय और भाषाई पृष्ठभूमि के लोग एक साथ शामिल हुए और एकता व आपसी सम्मान का संदेश दिया।

आयोजकों ने कहा कि इस आयोजन ने एक बार फिर मार्गेरिटा की धार्मिक सहिष्णुता और सामाजिक सौहार्द की पुरानी परंपरा को मजबूत किया है, जहां सभी समुदायों के त्योहार मिल-जुलकर मनाए जाते हैं। गुवाहाटी, डिब्रूगढ़, नगांव, बारपेटा, धुबरी, हैलाकांडी, श्रीभूमि, कछार, गोलपाड़ा और राज्य के अन्य हिस्सों में भी मुहर्रम शांतिपूर्ण ढंग से मनाया गया। जिलों के प्रशासन और पुलिस की ओर से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ताजिया जुलूस, मजलिस, धार्मिक सभाएं और विशेष नमाज का आयोजन किया गया।

संवेदनशील इलाकों और जुलूस मार्गों पर पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए थे। कई शहरों में जुलूसों के सुचारू संचालन के लिए यातायात में भी बदलाव किया गया। मुहर्रम पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन की शहादत की याद में मनाया जाता है। मुस्लिम समुदाय इस दिन शोक, इबादत और उन्हें याद करते हुए विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करता है।

असम में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए मुहर्रम के आयोजन ने एक बार फिर राज्य की सांप्रदायिक सद्भाव और विभिन्न समुदायों के बीच आपसी सम्मान की परंपरा को उजागर किया।

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