May 16, 2026
National

भारत के मुसलमान खतरे में, मुल्क बचाने के लिए राजनीति से पीछे हट जाना चाहिए : पूर्व सांसद मोहम्मद अदीब

Muslims in India are in danger, they should step back from politics to save the country: Former MP Mohammad Adeeb

राज्यसभा के पूर्व सांसद मोहम्मद अदीब ने आरोप लगाया है कि भारत के मुसलमान खतरे में हैं। एसआईआर के जरिए मुस्लिम वोटों को काटने का सिलसिला शुरू हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत अब नफरत की आंधी में झुलस रहा है। अगर हमें इस मुल्क को बचाना है तो मुसलमानों को राजनीति से पीछे हट जाना चाहिए। इस दौरान, मोहम्मद अदीब ने आईएएनएस से बात करते हुए असदुद्दीन ओवैसी पर भी सवाल उठाए हैं।

सवाल: भारतीय मुसलमानों को वोट क्यों नहीं करना चाहिए?

जवाब: मुसलमानों ने सारे तजुर्बे कर लिए। हर पार्टी के साथ जाकर देख लिया। लेकिन पिछले दस सालों में यह हो गया है कि मुसलमान इस मुल्क में एक कैटलिस्ट की शक्ल बना दिया गया है। मुल्क में बहुत कुछ तबाह हो गया, लेकिन चुनाव सिर्फ इस बात पर जीता जाता है कि मुसलमानों को सबक सिखाना है, उन पर सितम ढाना है। इसी पर जश्न मनाता है और चुनाव जीते जाते हैं। अगर इस देश को बचाना है, तो इस मुल्क में चुनाव रोजी-रोटी और रोजगार के मुद्दों पर होने चाहिए, न कि हिंदू-मुसलमान के नाम पर।

जब हमारी वजह से ये लोग चुनाव हार रहे हैं, तो कोई अच्छा काम करने वाला भी हरा दिया जाता है। अब इस वक्त दुश्मनी मुसलमानों के खिलाफ है और वर्तमान सरकार ने जिस तरह का माहौल तैयार किया है, मैं समझता हूं कि सबसे बेहतर तरीका यही है कि हम पीछे हट जाएं।

अभी एसआईआर के जरिए मुस्लिम वोटों को काटने का सिलसिला शुरू हुआ है। ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि एक पक्ष मानता है कि मुसलमान उन्हें वोट नहीं दे रहे हैं। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री का भी इस तरह का बयान आ चुका है कि मुसलमानों ने हमें वोट नहीं दिया है।

भारत अब नफरत की आंधी में झुलस रहा है। अगर हमें इस मुल्क को बचाना है तो मुसलमानों को पीछे हट जाना चाहिए, क्योंकि अब कोई तरीका बाकी नहीं रहा है। किसी भी राजनीतिक दल में मुसलमानों की कोई हैसियत नहीं है।

नफरत की बुनियाद पर हिंदू धर्म का मजाक उड़ाया जा रहा है। बेहतर यही है कि हमें अलग हो जाना चाहिए।

सवाल: अगर मुसलमान वोट न करें तो क्या उनके मताधिकार छीनने का खतरा नहीं होगा?

जवाब: अब क्या हो रहा है? सड़क पर चलते हुए, मस्जिद में या मस्जिद के बाहर हमें यह बताना पड़ता है कि हम कौन हैं। प्रधानमंत्री कहते हैं कि ‘हम कपड़ों से पहचान लेते हैं’, तो हमारी पहचान पहले ही तय कर दी गई है। इस मुल्क में हमें विलेन बना दिया गया है। बुलडोजर भी अधिकतर मुसलमानों के घरों पर चलते हैं।

अभी बंगाल में भाजपा की जीत के बाद मस्जिदों के अंदर जाकर बैंड बजाए जा रहे हैं। सब देख रहे हैं, पुलिस भी, और मामले सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच रहे हैं।

जब मैंने यह बयान दिया, तो कई मुसलमानों ने मेरी बात समझी, लेकिन कई गैर-मुसलमानों ने गालियां दीं और कहा, ‘पाकिस्तान चले जाओ’, जबकि खुद नेताओं के बच्चे दुनिया भर में जाकर दूसरी देशों की नागरिकता ले रहे हैं। भाजपा-आरएसएस से जुड़े नेताओं के बच्चे दूसरे देशों की नागरिकता ले रहे हैं। फिर भी मुसलमानों को सबक सिखाया जा रहा है।

इसका एक ही समाधान है कि सभी विरोधी पार्टियों को एक साथ आना होगा। अगर राष्ट्र को बचाना है तो सभी विपक्षी पार्टियों को एक साथ मिलकर लड़ना होगा। अगर राजनीतिक पार्टियां मिलकर चुनाव लड़ने को तैयार नहीं हैं, तो मुसलमानों को चुनावों से दूर हो जाना चाहिए।

सवाल: क्या भारत में मुसलमान खतरे में हैं?

जवाब: भारत के मुसलमानों की हैसियत क्या रह गई है? हम म्यांमार के मुसलमान होने जा रहे हैं। हम अभी गाजा के फिलिस्तीनी नहीं बने, लेकिन वह भी बन जाएंगे। अगर अदालतें इसी तरह खामोश रहीं और पुलिस में इसी तरह नफरत बनी रही, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।

भोपाल में बीते दिनों क्या हुआ (मुस्लिम युवक पर हमला), ये सभी ने देखा और आरोपी पुलिस की सुरक्षा में रहे। अगर पुलिस ईमानदार हो जाए और अदालतें एक्टिव रहें तो संविधान के अनुसार सभी बराबर होंगे, लेकिन अभी जमीनी स्तर पर ये स्थितियां नहीं हैं।

सवाल: क्या मुसलमान कांग्रेस पर भरोसा कर सकते हैं?

जवाब: हर पार्टी इस बात पर लग गई है कि मेरा हिंदू वोट न भाग जाए। उसने ये सोच लिया है कि मुसलमान तो मजबूरन हमें वोट देगा। इसलिए मैं मुसलमानों से कहता हूं कि इस मजबूरी को खत्म करने के लिए वे खुद पीछे हट जाएं। हमारी मस्जिदों पर चढ़कर तलवारें चलाई जाती हैं। कोई भी सड़क पर नहीं उतरता है। वो इसलिए कि उन्हें पता है कि मुसलमान मजबूरन उन्हें ही वोट देगा। इसके बावजूद मुसलमान यह तर्जुबा करता रहा है कि वे कभी लालू, कभी मुलायम और कभी कांग्रेस के साथ चले जाते हैं।

आखिर में हताशा के कारण ओवैसी जैसे लोग सामने आते हैं। ओवैसी की 2-3 प्रतिशत की फॉलोइंग इसलिए नहीं है कि वह कोई विकल्प दे रहे हैं, बल्कि इसलिए है कि मुसलमान हताश होने के कारण साथ देते हैं। अभी हिंदुओं का एक तबका सेकुलर है, लेकिन वह मुसलमानों के कारण ही चुनाव हारता है और देशद्रोही कहलाता है। उनकी सुरक्षा करनी चाहिए।

सवाल: अगर मुस्लिम अपने आप को एक तरफ कर लें, तो क्या इससे उन्हें लाभ मिलेगा?

जवाब: मुसलमानों की कुछ कम्युनिटीज हैं, जिनमें बोहरा और खोजा जैसी छोटी-छोटी कम्युनिटीज शामिल हैं। वो चुनाव में हिस्सा नहीं लेती हैं। यही उनकी खुशहाली है। इसलिए सभी मुस्लिमों को राजनीति से दूर हो जाना चाहिए। उन्हें अपने-अपने काम करने चाहिए, पढ़ना चाहिए और अपनी जिंदगी को बनाना चाहिए। हालांकि, मुश्किल यह है कि एक तबका ऐसा है, जो जिंदगी में कुछ करता ही नहीं है, उसको यह समझ में आता है कि पैसा कमाना है तो सियासत में चले जाओ, क्योंकि पैसा अब एक जरिया बन गया है। सियासत एक जरिया है लूटने का, खाने का। वो उसमें मस्त है। लेकिन एक आम आदमी, जिसका कोई लेना-देना नहीं है, जो बेचारा ठेला लगा रहा है।

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