अंधविश्वास के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता और अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी सचिन अंदुरे को जमानत दे दी है। 13 साल पहले 20 अगस्त 2013 को पुणे के महर्षि विठ्ठल रामजी ब्रिज पर सुबह मॉर्निंग वॉक के दौरान डॉ. दाभोलकर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुणे की विशेष सत्र अदालत ने साल 2024 में सचिन अंदुरे और शरद कलसकर को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अदालत ने डॉ. वीरेंद्र तावड़े, विक्रम भावे और वकील संजीव पुनालेकर को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।
सजा के बाद सचिन अंदुरे ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील दायर की थी और अपील पर अंतिम फैसला आने तक जमानत देने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई के बाद जमानत मंजूर कर ली।
इससे पहले 29 अप्रैल को इसी मामले में दूसरे दोषी शरद कलसकर को भी बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति रणजीतसिंह भोसले की पीठ ने कलसकर की जमानत याचिका स्वीकार की थी। जांच एजेंसी ने इस फैसले पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने 50 हजार रुपए के बॉन्ड पर शरद कलसकर को जमानत दी थी।
इस हत्या के मामले में कुल पांच लोगों को आरोपी बनाया गया था। डॉ. नरेंद्र दाभोलकर अंधविश्वास के खिलाफ लंबे समय से आंदोलन चलाते थे। उनकी हत्या ने पूरे देश में बहस छेड़ दी थी।


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