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समुद्री चुनौतियां और भविष्य के युद्ध पर नौसेना प्रमुख ने म्यांमार में की बात

Navy Chief speaks on maritime challenges and future warfare in Myanmar

 

नई दिल्ली,भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने म्यांमार की एक महत्वपूर्ण आधिकारिक यात्रा पूरी की है। अपनी इस आधिकारिक यात्रा के दौरान नौसेना प्रमुख म्यांमार नौसेना के प्रमुख से मुलाकात की और म्यांमार की नेवल ट्रेनिंग कमांड में उनकी विभिन्न इकाइयों के स्टाफ अधिकारियों और प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित किया।

अपने इस संदेश में उन्होंने ‘समुद्री क्षेत्र में उभरती चुनौतियां और भविष्य के युद्ध’ जैसे विषय पर विस्तृत दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। अपने संबोधन में नौसेना प्रमुख ने बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में साझा समुद्री चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारत और म्यांमार के बीच नेवी टू नेवी सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने भारत सरकार के ‘महा सागर’ विजन के तहत भारतीय नौसेना और म्यांमार नौसेना के बीच बेहतर समन्वय और साझेदारी को समय की आवश्यकता बताया है।

एडमिरल त्रिपाठी ने अपने चार दशकों से अधिक के नौसैनिक जीवन के अनुभव युवा अधिकारियों के साथ साझा किए। नौसैनिक नेतृत्व पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि बदलती परिस्थितियों में चुनौतियों का पूर्वानुमान लगाना, तेजी से अनुकूलन करना और जटिल स्थितियों का प्रभावी ढंग से सामना करना एक सफल सैन्य नेतृत्व की पहचान है। उन्होंने बताया कि स्पष्ट सोच और दृढ़ उद्देश्य, प्रभावी नेतृत्व के दो प्रमुख स्तंभ हैं। साथ ही उन्होंने निरंतर सीखने की प्रक्रिया और मानव-केंद्रित नेतृत्व पर बल देते हुए कहा कि तकनीक प्रगति का माध्यम है, लेकिन वास्तविक परिवर्तन वर्दीधारी पुरुषों और महिलाओं के प्रयासों से ही संभव होता है।

म्यांमार में नौसेना प्रमुख यह संबोधन भारत और म्यांमार के बीच बढ़ते समुद्री सहयोग तथा क्षेत्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वहीं प्रयागराज में भारतीय सेना द्वारा आयोजित सिम्पोजियम पर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने कहा कि सिम्पोजियम का मुख्य विषय ‘रक्षा त्रिवेणी संगम’ है। उन्होंने बताया कि इसका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना और ‘कैपेबिलिटी डेवलपमेंट’ के तीन मुख्य स्तंभों यानी उपयोगकर्ता, उद्योग और शिक्षा जगत को एक मंच पर लाना है। यहां पहली बार भारतीय सेना की दो फ्रंटलाइन कमांड्स ने अपने परिचालन अनुभवों को साझा करने के लिए हाथ मिलाया है।

यह सिम्पोजियम न केवल विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम है, बल्कि सीमाओं पर तैनात सैनिकों को तकनीक के माध्यम से व्यावहारिक समाधान प्रदान करने की दिशा में एक ठोस कदम है।

 

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