25 जून । 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की ओर से लगाए गए आपातकाल की 51वीं बरसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दिन को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय बताया। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने नागरिकों से कहा कि इस दाग को बार-बार याद करने की जरूरत है, ताकि देश में फिर कोई ऐसा पैदा न हो, जिसको इस पाप के रास्ते पर जाने की इच्छा हो जाए।
प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को इंस्टाग्राम पर हैशटैग ‘संविधान हत्या दिवस’ के साथ पोस्ट किया, “क्या आप जानते हैं कि हमारे लोकतांत्रिक इतिहास में 25 जून इतना महत्वपूर्ण क्यों है?”
उन्होंने लिखा, “आपातकाल लगाने वालों के माथे पर उस गंभीर पाप का कलंक हमेशा के लिए लग गया है। आज हम उन सभी लोगों को सलाम करते हैं, जो डटकर खड़े रहे। उन्हीं की वजह से लोकतंत्र बचा रहा। कभी माफ न करें और कभी न भूलें।”
पीएम मोदी ने अपने पोस्ट में शुरुआत में इंदिरा गांधी के आपातकाल की घोषणा का अंश शेयर किया, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री को कहते सुना गया, “राष्ट्रपति जी ने आपातकाल की घोषणा की है।” प्रधानमंत्री ने इसका शीर्षक दिया, “आपातकाल की 51वीं बरसी- जानिए क्यों इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय माना जाता है।”
पीएम मोदी ने संदेश में कहा, “आपातकाल लगाने वालों ने न सिर्फ हमारे संविधान की हत्या की, बल्कि उनका इरादा न्यायपालिका को भी अपना गुलाम बनाए रखने का था। इस दौरान लोगों को बड़े पैमाने पर प्रताड़ित किया गया। इसके अनेक उदाहरण हैं, जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता है। जॉर्ज फर्नांडिस साहब को जंजीरों में बांधा गया था और अनेक लोगों को कठोर यातनाएं दी गईं। मीसा के तहत किसी को भी ऐसे ही गिरफ्तार कर लिया जाता था। छात्रों को भी परेशान किया गया। अभिव्यक्ति की आजादी का भी गला घोंट दिया गया था। साथियों, उस दौर में जो हजारों लोग गिरफ्तार किए गए, उन पर ऐसे ही अमानवीय अत्याचार हुए।”
उन्होंने कहा, “देश के मीडिया को दबोच दिया गया था। पूरे हिंदुस्तान को जेलखाना बना दिया गया था, और सिर्फ किसी की सत्ता चली न जाए, इसलिए।”
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, “आपातकाल को मैंने बहुत निकट से देखा है। करोड़ों लोगों को यातनाएं दी गईं। उनका जीना मुश्किल कर दिया गया था। जिस संसद के अंदर होता था, वह तो रिकॉर्ड पर है। आप कल्पना कर सकते हैं कि वह दौर कैसा था। आपातकाल लगाने वालों ने न सिर्फ हमारे संविधान की हत्या की, बल्कि उनका इरादा न्यायपालिका को भी अपना गुलाम बनाए रखने का था, लेकिन बहुत कोशिशों, हजारों गिरफ्तारियों और लाखों लोगों पर अत्याचार के बाद भी भारत के लोगों का लोकतंत्र से विश्वास डिगा नहीं।”
इस दौरान, पीएम मोदी ने कहा कि जनभागीदारी की शक्ति से बड़े-बड़े संकटों का मुकाबला किया जा सकता है। उस समय जब मीडिया पर ताले लग चुके थे, हर किसी को लगता था कि आज शाम को पुलिस आएगी और पकड़ लेगी। ऐसे वातावरण में मेरे देश के लोगों का सामर्थ और ताकत देखिए, जाति, पंथ व संप्रदाय, इन सबसे ऊपर उठकर देश ने उस समय चुनाव में नतीजा दिया था, लोकतंत्र के लिए वोट किया था और लोकतंत्र को पुन:स्थापित किया था। ये मेरे देश के मतदाताओं की ताकत है।
अपने संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “संविधान की बातें बताना और संविधान को कुचलने का पाप करना, इन चीजों को कोई भूल नहीं सकता है। उस समय जो भी इस पाप के भागीदार थे, ये पाप कभी मिटने वाला नहीं है। इस दाग को बार-बार स्मरण करने की भी जरूरत है, ताकि देश में फिर कोई ऐसा पैदा न हो, जिसको इस पाप के रास्ते पर जाने की इच्छा हो जाए। इसलिए याद करना जरूरी है, किसी को भला-बुरा कहने के लिए नहीं।”


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