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एनएचआरसी ने ‘एनालॉग पनीर’ पर मांगे जवाब, एफएसएसएआई और राज्यों को दो हफ्ते में देनी होगी रिपोर्ट

NHRC seeks response on ‘analog paneer’; FSSAI and states required to submit report within two weeks.

दूध से बने पारंपरिक पनीर के विकल्प के तौर पर बाजार में बिक रहे “एनालॉग पनीर” को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने चिंता जताई है। आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो के नेतृत्व वाली बेंच ने इसके निर्माण, लाइसेंसिंग, बिक्री और उपभोग से जुड़े नियामकीय, पोषण और खाद्य सुरक्षा पहलुओं पर विस्तृत जानकारी मांगी है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के साथ सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

एनएचआरसी ने एफएसएसएआई से पूछा है कि एनालॉग पनीर की मौजूदा नियामकीय स्थिति क्या है और इसकी संरचना के लिए कौन से मानक लागू हैं। आयोग ने इसके पोषण मूल्य, संभावित स्वास्थ्य प्रभाव, खाद्य सुरक्षा मानकों और परीक्षण पद्धतियों पर भी स्पष्टीकरण मांगा है।

बेंच ने विशेष रूप से यह मूल सवाल उठाया है कि जब किसी उत्पाद की संरचना पारंपरिक दूध से बने पनीर से पर्याप्त रूप से अलग है, तो उसे पनीर के विकल्प के रूप में बनाने और बाजार में बेचने की अनुमति देने का नियामकीय और पोषण संबंधी आधार क्या है। आयोग ने दूध से बने पनीर और वनस्पति तेल या वसा तथा अन्य गैर-दुग्ध घटकों से तैयार उत्पादों के बीच अंतर करने वाली वैज्ञानिक परीक्षण पद्धतियों की जानकारी भी मांगी है। इसमें बीटा-सिटोस्टेरोल की भूमिका और प्रासंगिकता भी शामिल है।

आयोग ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों से एनालॉग पनीर के निर्माण, आपूर्ति, बिक्री और खाद्य प्रतिष्ठानों में इसके परोसे जाने की स्थिति बताने को कहा है। उनसे निरीक्षण, सैंपलिंग, सामने आए उल्लंघनों और की गई प्रवर्तन कार्रवाई का ब्यौरा भी मांगा गया है।

एनएचआरसी ने उपभोक्ताओं के सूचना के अधिकार को भी महत्वपूर्ण मुद्दा माना है। बेंच जानना चाहती है कि क्या उपभोक्ताओं को ऐसे उत्पादों की पहचान, वास्तविक संरचना और पोषण संबंधी विशेषताओं के बारे में स्पष्ट और पर्याप्त जानकारी दी जा रही है, ताकि वे खरीद और सेवन को लेकर सूचित निर्णय ले सकें।

यह मामला एडवांस्ड स्टडी इंस्टीट्यूट ऑफ एशिया (एएसआईए), स्वास्थ्य समता केंद्र की शिकायत के आधार पर आयोग के समक्ष आया। शिकायत के साथ ‘एनालॉग पनीर इन इंडिया: ए फूड-सिस्टम्स थ्रेट टू हेल्थ इक्विटी’ नामक रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई थी। एनएचआरसी ने संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट और शिकायत में उठाए गए मुद्दों पर विस्तृत जांच की जरूरत महसूस की है।

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