July 17, 2026
National

राजस्थान में मातृ मृत्यु मामले पर एनएचआरसी सख्त, मुख्य सचिव को नोटिस; दो हफ्ते में मांगी रिपोर्ट

NHRC takes a stern view of maternal death cases in Rajasthan; issues notice to Chief Secretary and seeks a report within two weeks.

17 जुलाई । राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने राजस्थान के भीलवाड़ा और बांसवाड़ा जिलों में प्रसव के बाद महिलाओं की मौत के मामलों का स्वत: संज्ञान (सुओ मोटू) लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

एनएचआरसी ने यह कार्रवाई मीडिया में प्रकाशित उन खबरों के आधार पर की है, जिनमें दोनों जिलों के सरकारी अस्पतालों में प्रसव या प्रसव संबंधी उपचार के बाद महिलाओं की मौत की जानकारी सामने आई थी।

रिपोर्टों के अनुसार, एक सप्ताह के भीतर आठ महिलाओं, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है, की मौत हुई। इनमें भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में पांच और बांसवाड़ा जिला अस्पताल में तीन महिलाओं की मौत हुई थी।

आयोग ने अपने नोटिस में कहा कि यदि मीडिया में प्रकाशित तथ्य सही हैं, तो यह मामला सुरक्षित मातृ स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच से जुड़े मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का संकेत देता है। एनएचआरसी ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सरकार से इन मौतों की परिस्थितियों, चल रही जांच की स्थिति और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों की विस्तृत जानकारी मांगी है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बांसवाड़ा में प्रसव के बाद महिलाओं की मौत का सिलसिला अभी भी जारी है। बुधवार रात एक और महिला की प्रसव के बाद मौत हो गई। यह घटना उस समय हुई जब राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर जिले के दौरे पर थे।

बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में बांसवाड़ा में छह प्रसूता महिलाओं और तीन नवजात शिशुओं की मौत हो चुकी है।

प्रारंभिक जांच में कई मामलों में गंभीर एनीमिया (खून की कमी) को मातृ मृत्यु का संभावित कारण माना गया है। ताजा मामले में सज्जनगढ़ ब्लॉक के कलाखूंटा गांव की 20 वर्षीय शिल्पा ने अस्पताल पहुंचने से पहले मृत शिशु को जन्म दिया था। अत्यधिक रक्तस्राव और गंभीर हालत के कारण उसे पहले ग्रामीण अस्पताल से बांसवाड़ा जिला अस्पताल और फिर उदयपुर रेफर किया गया, जहां 15 जुलाई को उसकी मौत हो गई।

बांसवाड़ा में जिन महिलाओं की मौत की जानकारी सामने आई है, उनमें रेखा (29), रेशमा (23), लक्ष्मी (21), लीला (32) और लक्ष्मी (32) शामिल हैं।

भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में छह दिनों के भीतर सीजेरियन (सी-सेक्शन) प्रसव के बाद पांच महिलाओं की मौत हुई। मृतकों की पहचान शिमला गुर्जर (5 जुलाई), फोरी देवी (7 जुलाई), ईशा पांडे (8 जुलाई), दिव्या (9 जुलाई) और संगीता जिनागर (10 जुलाई) के रूप में हुई है।

रिपोर्टों के अनुसार, सभी महिलाओं की हालत बिगड़ने पर उन्हें मेडिकल इंटेंसिव केयर यूनिट (एमआईसीयू) में भर्ती कराया गया था, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

इस बीच, अस्पताल के एक ऑपरेशन थिएटर की संक्रमण जांच (इन्फेक्शन स्क्रीनिंग) में संक्रमण पाए जाने की भी खबरें सामने आई हैं, जिसके बाद मामले की जांच और तेज कर दी गई है। हालांकि, महात्मा गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अरुण गौर ने चिकित्सा लापरवाही के आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि सभी मौतें गंभीर प्रसूति संबंधी जटिलताओं के कारण हुई हैं। अब एनएचआरसी मुख्य सचिव की रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य सरकार की कार्रवाई और जवाबदेही की समीक्षा करेगा।

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