October 19, 2026
Himachal

बिजली नहीं तो बिजली के खंभे नहीं बिलासपुर पंचायत प्रधान का बिजली बोर्ड को अल्टीमेटम

हिमाचल प्रदेश में स्मार्ट बिजली मीटरों को लेकर चल रहे विवाद में एक अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया है। बिलासपुर जिले की कपाहरा ग्राम पंचायत के प्रधान विनय शर्मा ने हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (एचपीएसईबीएल) को नोटिस भेजकर अपनी जमीन से बिजली के खंभे, तार और अन्य बुनियादी ढांचे को हटाने को कहा है। स्मार्ट मीटर लगाने से इनकार करने पर उनका बिजली कनेक्शन काट दिया गया था।

बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग करने के बजाय, शर्मा ने मांग की है कि विभाग 24 घंटे के भीतर अपना ढांचा हटा दे और उस अवधि के लिए उन्हें मुआवजा दे जिसके दौरान उसने उनकी जमीन का इस्तेमाल किया है। “जब बिजली बोर्ड ने एकतरफा रूप से मुझे अपनी सेवाएं बंद करने का फैसला किया है, तो मैं बोर्ड को अपनी जमीन का इस्तेमाल करने की अनुमति क्यों दूं?” शर्मा ने कहा, साथ ही उन्होंने विभाग को भी वही 24 घंटे की समय सीमा दी थी जो बोर्ड ने बिजली आपूर्ति बंद करने से पहले उन्हें दी थी।

शर्मा ने यह भी घोषणा की कि उपभोक्ताओं की सहमति के बिना स्मार्ट मीटर लगाने के विरोध में उनकी पंचायत सोमवार को शिमला-धर्मशाला राजमार्ग को अवरुद्ध करेगी। उन्होंने दावा किया कि अन्य पंचायतों के निवासी भी प्रस्तावित अवरोध में शामिल होंगे। यह टकराव कापहरा ग्राम पंचायत द्वारा स्मार्ट मीटरों के विरोध से उपजा है। ग्राम सभा ने इनके इंस्टॉलेशन के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया था और बाद में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की थी।

उपभोक्ताओं की सहमति के बिना मीटर लगाने की आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए शर्मा ने कहा कि निवासियों को बिजली के बिल बढ़ने का डर है क्योंकि इन उपकरणों का नियंत्रण निजी कंपनी के पास होगा। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि अगर लगभग ₹10,000 की लागत वाला स्मार्ट मीटर क्षतिग्रस्त हो जाता है या उसे बदलने की आवश्यकता पड़ती है तो गरीब परिवारों पर कितना वित्तीय बोझ पड़ेगा।

शर्मा ने आरोप लगाया कि पंचायत के प्रस्ताव और अदालत में चल रही कार्यवाही की जानकारी होने के बावजूद बिजली बोर्ड ने उनका कनेक्शन काट दिया। उनके अनुसार, विभाग ने 14 अक्टूबर को नोटिस जारी किया और अगले दिन, जब वे घर पर नहीं थे, बिजली काट दी। शर्मा ने दावा किया कि उन्होंने नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान किया था और उन्होंने कनेक्शन काटने की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कार्रवाई अनुचित थी।

हालांकि, स्थानीय उप-विभागीय अधिकारी (एसडीओ) ने विभाग की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि उपभोक्ता को मौजूदा मीटर को स्मार्ट मीटर से बदलने के प्रस्तावित निर्णय के बारे में पहले ही सूचित कर दिया गया था, लेकिन उसने इसका पालन करने से इनकार कर दिया था।

एसडीओ ने कहा, “बिजली मीटर बोर्ड की संपत्ति है और विभाग इसे स्मार्ट मीटर से बदल रहा है। अगर वह स्मार्ट मीटर लगवाने से इनकार करता है तो उसका कनेक्शन काटने का प्रावधान है।” प्रस्तावित राजमार्ग अवरोध विवाद को और तीव्र कर सकता है, जिससे स्मार्ट मीटर स्थापना, उपभोक्ता चिंताओं और बिजली बोर्ड की प्रवर्तन शक्तियों का मुद्दा अधिक स्पष्ट रूप से सामने आ सकता है।

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