March 11, 2026
National

घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की कमी नहीं, वाणिज्यिक ग्राहकों के लिए डिलीवरी बंद : गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन

No gas shortage for domestic consumers, deliveries stopped for commercial customers: Gas Distributors Association

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर अब भारत में एलपीजी और गैस सप्लाई पर भी दिखाई देने लगा है। कर्नाटक के कई शहरों में गैस की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। कर्नाटक के हुबली में गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के नेता सुरेशा ने आईएएनएस से बताया कि घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल किसी तरह की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि पहले घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस सिलेंडर लेने का अंतराल 21 दिन था, जिसे अब 4 दिन बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। यानी अब ग्राहक 25 दिन बाद गैस सिलेंडर ले सकेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन कमर्शियल ग्राहकों के लिए गैस की डिलीवरी फिलहाल बंद कर दी गई है।

इस फैसले से होटल और कैटरिंग कारोबार पर बड़ा असर पड़ा है। हुबली कैटरिंग एसोसिएशन के प्रमुख रत्नाकर शेट्टी ने कहा कि गैस सप्लाई की समस्या इस समय बहुत गंभीर हो गई है। उन्होंने कहा, “अचानक गैस सप्लाई बंद हो जाने से हमें बहुत परेशानी हो रही है और कारोबार चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। हमारा व्यवसाय सिर्फ हमारी रोज़ी-रोटी नहीं है, बल्कि करीब 150 लोग हमारे साथ काम करते हैं और उनकी आजीविका भी इसी पर निर्भर है।”

रत्नाकर शेट्टी ने बताया कि इस समस्या को लेकर सभी व्यापारी एकजुट होकर सरकार से मदद की अपील कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द से जल्द गैस सिलेंडर सप्लाई से जुड़ी समस्याओं का समाधान करे। वहीं, बेंगलुरु में कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी इस मुद्दे पर मंगलवार को चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि देशभर में हालात गंभीर हो सकते हैं।

डीके शिवकुमार ने कहा, “पूरा देश इस समस्या से जूझ रहा है। गैस की कमी के कारण कई होटल बंद करने की नौबत आ गई है। अगर यही स्थिति रही तो सभी चीजों के दाम बढ़ जाएंगे। लोग मजबूरी में लकड़ी, इलेक्ट्रिक स्टोव या केरोसिन स्टोव का सहारा लेने लगेंगे। लेकिन केरोसिन भी सभी को उपलब्ध नहीं है।” उन्होंने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मुद्दे पर संसद में चर्चा होनी चाहिए, क्योंकि विदेश नीति और सप्लायर देशों के साथ रिश्तों का असर अब सीधे देश की सप्लाई पर पड़ता दिख रहा है।

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