20 मार्च । गौतमबुद्धनगर पुलिस ने साइबर ठगी के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए दो शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) का अधिकारी बताकर लोगों को डराते थे और “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करते थे।
पुलिस ने इनके कब्जे से घटना में इस्तेमाल दो मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, पीड़ित ने थाना साइबर क्राइम में शिकायत दर्ज कराई थी कि 13 मार्च 2026 को अज्ञात व्यक्तियों ने उसे कॉल कर खुद को ट्राई अधिकारी बताया। आरोपियों ने पीड़ित को यह कहकर डराया कि उसके मोबाइल नंबर से अश्लील वीडियो भेजे जा रहे हैं और इस मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई द्वारा की जा रही है।
इसके बाद आरोपियों ने “डिजिटल अरेस्ट” का भय दिखाकर जांच के नाम पर उससे लाखों रुपये ठग लिए। शिकायत के आधार पर थाना साइबर क्राइम पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और एक टीम का गठन किया। तकनीकी साक्ष्यों और गोपनीय सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए 19 मार्च 2026 को पुलिस ने सेक्टर-63 क्षेत्र से दो आरोपियों- रिषभ तिवारी (21 वर्ष) और कुवंर शुक्ला (20 वर्ष), दोनों निवासी अमेठी को गिरफ्तार कर लिया।
जांच में सामने आया कि आरोपी संगठित साइबर गिरोह से जुड़े हुए हैं और ठगी करने वाले अन्य अपराधियों को अपने बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। इनके खातों में साइबर ठगी से संबंधित लगभग 10.95 लाख रुपये प्राप्त हुए हैं। वहीं, इनके संयुक्त खातों के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली, बिहार और जम्मू-कश्मीर में कुल 6 शिकायतें दर्ज हैं।
इन मामलों में अब तक करीब 4.17 करोड़ रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है। पुलिस ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। साथ ही, इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी जारी है।
पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर खुद को सरकारी अधिकारी बताने वाले व्यक्ति पर तुरंत भरोसा न करें। “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई प्रक्रिया नहीं होती है और कोई भी एजेंसी फोन पर गिरफ्तारी नहीं करती। यदि कोई व्यक्ति इस तरह से डराकर पैसे मांगता है, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें या नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।


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