N1Live National देश के लिए जान दे सकते हैं, लेकिन पूजा के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता : एसटी हसन
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देश के लिए जान दे सकते हैं, लेकिन पूजा के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता : एसटी हसन

One can lay down one's life for the country, but cannot be forced to worship: ST Hasan

संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। विपक्ष जहां कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है, वहीं सरकार भी विधायी एजेंडे को अंतिम रूप देने में जुटी है। इसी बीच वंदे मातरम से जुड़े एक संभावित विधेयक को सदन में पेश किए जाने की चर्चा है। इस पर समाजवादी पार्टी के नेता एसटी हसन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार अनावश्यक रूप से विवाद खड़ा करने की कोशिश कर रही है।

एसटी हसन ने कहा कि यह बहुत पुराना विवाद है। यह अंग्रेजों के जमाने से चला आ रहा है। मुसलमानों ने राष्ट्रगान पढ़ने से मना नहीं किया, लेकिन वंदे मातरम में जमीन की पूजा की जा रही है। हमारा मानना है कि अल्लाह ने इंसान को सर्वोच्च प्राणी बनाकर भेजा है। दुनिया में तमाम चीजें ऐसी हैं, जो इंसान की जिंदगी को सुगम बनाती हैं। हम उन चीजों की पूजा या इबादत नहीं कर सकते। अगर हम ऐसा नहीं कर सकते तो हमें क्यों मजबूर किया जा रहा है कि हम उसे पढ़ें। सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि इसको लेकर जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए। हम अपने मुल्क और जमीन के लिए जान कुर्बान कर सकते हैं, लेकिन हमसे यह उम्मीद न की जाए कि हम पूजा करना शुरू कर दें।

एसटी हसन ने कहा कि कल आप यह भी कह देंगे कि इस्लामिक पद्धति छोड़कर पूजा करना शुरू कर दें। ऐसे आप देश को कहां लेकर जाएंगे? क्या यह सब मुमकिन है?

कॉकरोच पार्टी आंदोलन और सोनम वांगचुक के अनशन पर उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन देश के युवाओं के भविष्य के लिए अच्छा है। देश के सारे युवा और हितैषी उनके साथ खड़े हैं। कोई भी परीक्षा सही तरीके से नहीं हो रही है। लोग आत्महत्या कर रहे हैं। जो जिम्मेदार लोग हैं, उन्हें अपने पद पर बने रहने का क्या हक है कांवड़ यात्रा को लेकर एसटी हसन ने कहा कि सरकार की यह भी जिम्मेदारी है कि आम लोगों का भी ख्याल रखा जाए। कांवड़ यात्रा सुचारु रूप से हो, जिससे न कांवड़ यात्रियों को परेशानी हो और न ही आम लोगों को दिक्कत हो।

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