भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने राम मंदिर में कथित चढ़ावा मामले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष इसे आधार बनाकर पूरे राम मंदिर और अयोध्या को बदनाम करने की कोशिश कर रही हो जो सही नहीं है। भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया है, कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। दोषी चाहे कहीं भी हों, उन्हें कानून के दायरे में लाया जाएगा। आरोपी बचने वाले नहीं हैं।
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अतीत में भी राम मंदिर निर्माण का विरोध किया था। कपिल सिब्बल ने सर्वोच्च न्यायालय में मंदिर निर्माण संबंधी सुनवाई टालने की मांग की थी। साथ ही उन्होंने रामसेतु विवाद और कांग्रेस सरकार के दौरान दायर हलफनामे का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस ने भगवान राम के अस्तित्व पर भी सवाल उठाए थे। अब भी कांग्रेस राम मंदिर को राजनीतिक मुद्दा बनाकर बदनाम करने का प्रयास कर रही है।
चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनाव हारने पर चुनाव आयोग और ईवीएम पर सवाल उठाते हैं, जबकि जीत मिलने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं होती।
उन्होंने कहा कि पहले चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति केवल प्रधानमंत्री की अनुशंसा पर होती थी, जबकि अब एक समिति के माध्यम से नियुक्ति की प्रक्रिया अपनाई जाती है। उनके अनुसार चुनाव आयोग निष्पक्ष तरीके से कार्य कर रहा है और मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) के कारण फर्जी मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं।
एनसीईआरटी से जुड़े एक मामले पर उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी ने न्यायालय में सरकार का पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रखा या किसी ब्लैकलिस्टेड सप्लायर के प्रति नरम रुख अपनाया है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करती।
संसद के मानसून सत्र से पहले प्रस्तावित सर्वदलीय बैठक पर भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि यह संसदीय परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस बैठक और पूरे मानसून सत्र में सक्रिय रूप से भाग लेंगे। साथ ही उन्होंने राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे कई महत्वपूर्ण मौकों पर सदन से अनुपस्थित रहते हैं और गंभीर विधायी चर्चाओं में पर्याप्त भागीदारी नहीं करते।


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