July 22, 2026
National

विपक्षी सांसदों ने की मांग, सरकार नीट, शिक्षा व्यवस्था सहित बुनियादी मुद्दों पर करे चर्चा

Opposition MPs demand government discussion on fundamental issues, including NEET and the education system.

कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के सांसदों ने शिक्षा व्यवस्था, नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं, दलबदल विरोधी कानून, राम मंदिर में चढ़ावा के कथित दुरुपयोग और छात्रों के आंदोलन जैसे विषयों को उठाते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उनकी पार्टी चाहती है कि मॉनसून सत्र सार्थक ढंग से चले लेकिन इसके लिए जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दों पर चर्चा आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था में सामने आई गंभीर खामियों के लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए। अयोध्या राम मंदिर में मिले चढ़ावे के कथित दुरुपयोग पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए और यदि कोई अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। मनीष तिवारी ने बताया कि उन्होंने संसद में स्थगन प्रस्ताव देकर नए दलबदल विरोधी कानून की मांग की है। उनके अनुसार, मौजूदा कानून अपने उद्देश्य को पूरा करने में विफल रहा है। नए कानून में ऐसे प्रावधान होने चाहिए जो केवल राजनीतिक अवसरवाद के लिए होने वाले दल-बदल पर रोक लगाएं, जबकि वैचारिक मतभेद और लोकतांत्रिक असहमति की गुंजाइश बनी रहे।

उन्होंने कहा कि जून 2024 में चुनी गई संसद की राजनीतिक तस्वीर जुलाई 2026 तक काफी बदल चुकी है, इसलिए इस विषय पर गंभीर विचार आवश्यक है। कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के मुद्दे को उठाते हुए सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सोनम वांगचुक को गिरफ्तार किया गया, उनके परिवार को उनसे मिलने नहीं दिया गया और उन्हें अब तक रिहा नहीं किया गया। कांग्रेस, राहुल गांधी और देश के छात्र लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं।

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा में कथित हेराफेरी के आरोपों को लेकर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दान के पैसे में कथित गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने संसद में नोटिस दिया है और सरकार से जवाबदेही की मांग की जाएगी।

कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने आरोप लगाया कि सरकार विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष के साथ सहमति बनाने में पूरी तरह विफल रही है। देश के सामने कई गंभीर विषय हैं लेकिन सरकार उन पर चर्चा कराने को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रही। उनके अनुसार, सरकार संसद में संवाद और बहस से बच रही है।

कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने नीट और सीबीएसई परीक्षा में पेपर लीक के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से देशभर के लाखों छात्रों और उनके परिवारों में चिंता का माहौल है। उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक रोकने और परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए।

वेणुगोपाल ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इस विषय पर चर्चा से बच रही है और लोकसभा अध्यक्ष विपक्ष को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दे रहे हैं। कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने भी कहा कि नीट और पेपर लीक का मुद्दा उनकी पार्टी की सर्वोच्च प्राथमिकता है। विपक्ष के सांसद प्लेकार्ड के माध्यम से सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लिया जाए।

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने छात्रों के आंदोलन और युवाओं की स्थिति को लेकर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इन मुद्दों पर ध्यान दिया जाता तो ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न नहीं होतीं। युवाओं के साथ सरकार का रवैया अस्वीकार्य है और आत्महत्या जैसी घटनाएं अत्यंत चिंताजनक हैं।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी सांसदों को पुलिस थाने में रखा गया जबकि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ कठोर व्यवहार किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नीट परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। सरकार रोजगार और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर विफल रही है। नीट से प्रभावित छात्रों को न्याय मिले और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए।

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