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पंजाब में तीन लाख से अधिक कर्मचारी हड़ताल पर, सरकारी सेवाएं प्रभावित

Over 300,000 employees on strike in Punjab; government services affected.

पंजाब में सभी विभागों, बोर्डों और निगमों के तीन लाख से अधिक कर्मचारी अपनी लंबित मांगों को लेकर गुरुवार को हड़ताल पर चले गए। इसके कारण पंजाब में सरकारी सेवाएं प्रभावित हुई हैं। पंजाब के कर्मचारी महंगाई भत्ता (डीए) के बकाया और दूसरी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। गुरुवार को सभी कर्मचारियों ने एक दिन का सामूहिक आकस्मिक अवकाश ले लिया। बताया गया कि लगभग चार लाख पेंशनभोगियों के साथ मिलकर ये कर्मचारी जिला, तहसील और ब्लॉक स्तर पर सरकारी कार्यालयों में दिन भर धरना देंगे।

इस ‘महा हड़ताल’ का असर सरकारी अस्पतालों, डिस्पेंसरियों और शिक्षण संस्थानों में भी देखा गया। हालांकि, बाजार, प्राइवेट संस्थान, प्राइवेट व पब्लिक ट्रांसपोर्ट बसें और इमरजेंसी सेवाएं इस बंद से बाहर रखी गई हैं। कर्मचारी यूनियनों के अनुसार, उनका 20,161 करोड़ रुपए का महंगाई भत्ता बकाया है। इसमें से 6,000 करोड़ रुपए 2021 से बकाया हैं, जबकि बाकी 14,161 करोड़ रुपए 2021 से पहले के हैं।

कर्मचारियों को मूल वेतन का 42 प्रतिशत महंगाई भत्ता (डीए) मिल रहा है, जबकि उनका दावा है कि यह 58 प्रतिशत होना चाहिए।

हालांकि, इस विषय को सुलझाने के लिए हड़ताल से एक दिन पहले राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने चंडीगढ़ में कई कर्मचारी संघों के साथ बैठकें कीं। उन्होंने बैठक में कहा, “भगवंत मान सरकार आपकी मांगों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। आपकी अधिकतर मुख्य मांगों पर कार्रवाई पहले से ही चल रही है।”

उन्होंने ट्रांसपोर्ट विभाग, शिक्षा विभाग, पशुपालन विभाग और वित्त विभाग को निर्देश भी दिए और कहा, “कर्मचारी यूनियनों की जायज मांगों पर पूरी सहानुभूति के साथ विचार करें। उनके जल्द समाधान के लिए जरूरी कार्रवाई में तेजी लाएं।” वहीं, हड़ताल के बीच, मुख्यमंत्री भगवंत मान गुरुवार को जालंधर में पंजाब आर्म्ड पुलिस (पीएपी) कॉम्प्लेक्स में कर्मचारी यूनियनों के नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं।

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने 3 अगस्त को सरकार को 15 दिनों के भीतर बकाया महंगाई भत्ते (डीए) का भुगतान करने का निर्देश दिया था। साथ ही, कोर्ट ने बकाया राशि का भुगतान होने तक राज्य को बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियान चलाने से भी रोक दिया था।

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