February 21, 2026
Himachal

पालमपुर: पशुओं में दवाओं के अंधाधुंध उपयोग के कारण एंटीबायोटिक प्रतिरोध पर जोर दिया गया है।

Palampur: Antibiotic resistance has been on the rise due to indiscriminate use of medicines in animals.

डॉ. जी.सी. नेगी कॉलेज ऑफ वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज के पशु चिकित्सा पैथोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित पशु चिकित्सा फार्मासिस्टों के लिए तीन दिवसीय कौशल विकास कार्यक्रम का समापन गुरुवार को सीएसके हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर में हुआ।

यह प्रशिक्षण ‘चंबा, लाहौल और स्पीति तथा किन्नौर जिलों में अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के लिए पशुपालन पद्धतियों में वैज्ञानिक प्रगति, विशेष रूप से अश्वों की आबादी पर ध्यान केंद्रित करते हुए’ नामक परियोजना के अंतर्गत आयोजित किया गया था। इस परियोजना का वित्तपोषण राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र, हिसार (हरियाणा) द्वारा किया जाता है।

कुलपति एके पांडा ने समापन सत्र की अध्यक्षता की। उन्होंने राज्य के आदिवासी क्षेत्रों में पशुधन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किए गए अत्यंत प्रासंगिक और सामाजिक रूप से प्रभावशाली कार्यक्रम के लिए पशु चिकित्सा रोगविज्ञान विभाग की सराहना की।

उन्होंने प्रशिक्षण अवधि के दौरान पशु चिकित्सा फार्मासिस्टों के उत्साह, समर्पण और सक्रिय भागीदारी पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने प्रतिभागियों से प्राप्त सकारात्मक प्रतिक्रिया की सराहना की और उनसे आग्रह किया कि वे कार्यक्रम के दौरान प्राप्त ज्ञान और व्यावहारिक कौशल को अपने-अपने क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से लागू करें।

पांडा ने एंटीबायोटिक प्रतिरोध और पशुओं में दवाओं, विशेष रूप से एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध उपयोग से उत्पन्न होने वाले दुष्प्रभावों के मुद्दे पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया और पशुधन और मुर्गी पालन में रोगों के स्थायी प्रबंधन के लिए हिमालयी मूल की वनस्पति-आधारित औषधियों को बढ़ावा देने की वकालत की।

पशु चिकित्सा रोगविज्ञान विभाग के प्रमुख आर.डी. पाटिल ने कार्यक्रम पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की।

पाठ्यक्रम समन्वयक राकेश कुमार ने अब तक परियोजना के अंतर्गत हुई प्रगति के बारे में सभा को जानकारी दी। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के आदिवासी जिलों में आयोजित अश्व स्वास्थ्य जांच शिविरों के बारे में भी बताया। कार्यक्रम का समापन पाठ्यक्रम सह-समन्वयक सोनाली मिश्रा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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