हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।
2 सितंबर 2026 (बुधवार) को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि (अगले दिन सुबह 4:26 बजे) तक रहेगी। इसके बाद सप्तमी तिथि शुरू हो जाएगी। इस दिन हलषष्ठी (हलषष्ठी/हरछठ) का व्रत है; इस दिन भगवान बलराम और हल (साथ ही सात प्रकार के अनाजों व पसई के चावल) की पूजा करना बहुत फलदायी होता है। यह व्रत मुख्य रूप से संतान की लंबी आयु और उनकी रक्षा के लिए माताएं रखती हैं। सुबह 5:59 बजे से सुबह 09:10 बजे तक पूजा का सर्वोत्तम समय रहेगा।
बुधवार को सुबह 6:13 बजे सूर्योदय और शाम 6:40 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, रात 9:58 बजे चंद्रोदय और अगले दिन सुबह 11:54 बजे चंद्रास्त होगा। पंचांग के अनुसार, 2 सितंबर 2026 को सूर्य पूर्वा फाल्गुनी में रहेगा, जबकि चंद्रमा सुबह 2:42 बजे तक अश्विनी नक्षत्र में रहेगा, इसके बाद भरणी नक्षत्र में प्रवेश करेगा।
बुधवार को हर्षण योग नहीं रहेगा, बल्कि इस दिन ध्रुव योग है। अभिजित मुहूर्त सुबह 11:55 से दोपहर 12:46 तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है। अमृत काल रात 8:44 से रात 10:16 बजे तक रहेगा।
वहीं, राहुकाल दोपहर 12:26 बजे से 1:59 बजे और गुलिक काल सुबह 10:53 से 12:26 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, यमगंड काल सुबह 7:46 से दोपहर 9:19 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए, क्योंकि इन्हें अशुभ समय माना जाता है।
बुधवार को इस दिन सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा मेष राशि में स्थित रहेगा। उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा करना अनिवार्य हो, तो कुछ विशेष ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।

