अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 26 प्रतिशत टैरिफ से यहां के निर्यातकों में हड़कंप मच गया है। अब कपड़ा उत्पादों के क्षेत्र में तुर्की और मिस्र प्रमुख प्रतिस्पर्धी बनकर उभर सकते हैं।
‘टेक्सटाइल सिटी’ का निर्यात कारोबार करीब 20,000 करोड़ रुपये का है। इसमें से अकेले अमेरिका को सालाना 10,000 करोड़ रुपये के उत्पाद, खास तौर पर कालीन और चटाई निर्यात किए जाते हैं।
हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (एचसीसीआई) के पानीपत चैप्टर के चेयरमैन विनोद धमीजा ने कहा कि ट्रंप के पारस्परिक टैरिफ से पानीपत के उद्योग को भारी नुकसान होगा। हालांकि, वास्तविक स्थिति आने वाले दिनों में स्पष्ट होगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उत्पादों पर कितना टैरिफ लगाया गया है।
उन्होंने कहा कि मुख्य रूप से मिस्र और तुर्की आने वाले दिनों में कपड़ा उत्पादों, विशेषकर बाथमैट और फ्लोर मैट के लिए सबसे बड़े प्रतिस्पर्धी के रूप में उभरेंगे।
यंग एक्सपोर्टर्स सोसायटी के रमन छाबड़ा ने कहा कि पानीपत निर्यात उद्योग पहले से ही रूस-यूक्रेन युद्ध, लाल सागर में अशांति आदि के कारण संकट से जूझ रहा था और अब ट्रंप द्वारा घोषित नया टैरिफ एक झटका है।
उन्होंने कहा कि चूंकि भारतीय उत्पाद अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए अधिक महंगे हो जाएंगे, इसलिए उत्पादों की बिक्री में गिरावट आ सकती है, जो एक बड़ा झटका होगा।
हैंडलूम एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (HEPC) के चेयरमैन और पानीपत एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ललित गोयल ने कहा कि यहां उद्योग में धारणा कमजोर है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी बाजार में कालीन और गलीचे को लग्जरी आइटम माना जाता है और उत्पाद की लागत 25 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी, जिससे कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि तुर्की और मिस्र उच्च गुणवत्ता वाले मशीन-निर्मित स्नान मैट और कालीन का उत्पादन करते हैं और वे भारत के सबसे बड़े प्रतिस्पर्धी बन जाएंगे, क्योंकि उन्हें केवल 10 प्रतिशत का टैरिफ का सामना करना पड़ेगा।
गोयल ने कहा कि नए टैरिफ ढांचे की घोषणा के बाद विदेशी खरीदारों ने भी ऑर्डर रोकना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा, “हम अपनी चिंताओं के समाधान के लिए एचईपीसी के माध्यम से केंद्रीय उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री तथा अन्य उच्च अधिकारियों को पत्र लिखेंगे।”
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