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पैरा एशियन गेम्स को तरजीह, ‘वर्ल्ड नंबर-1’ खिलाड़ी शीतल देवी ने एलए28 पैरालंपिक्स पर फोकस टाला

Para Asian Games preferred, 'World No. 1' player Sheetal Devi defers focus to LA28 Paralympics

 

नई दिल्ली,वर्ल्ड आर्चरी पैरा चैंपियन और वर्ल्ड नंबर-1 खिलाड़ी शीतल देवी फिलहाल एलए 2028 पैरालंपिक्स पर ध्यान नहीं दे रही हैं। उनकी निगाहें अभी वर्तमान पर ही टिकी हुई हैं। वह पैरालंपिक्स के बड़े लक्ष्य की ओर देखने से पहले, इस साल के आखिर में जापान में होने वाले पैरा एशियन गेम्स की ओर कदम-दर-कदम आगे बढ़ने पर फोकस कर रही हैं।

 

 

पिछले महीने, शीतल को वर्ल्ड आर्चरी अवार्ड्स में ‘पैरा-आर्चर ऑफ द ईयर’ का सम्मान मिला। शीतल ने यह सम्मान 2025 के शानदार सीजन के बाद हासिल किया था, जिसमें ग्वांगजू में वर्ल्ड टाइटल भी शामिल है।

 

भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) की ओर से आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शीतल ने कहा, “मैं बहुत आगे के बारे में नहीं सोचती, जैसे सीधे पैरालंपिक्स के बारे में सोचना। मुझे एक-एक कदम करके आगे बढ़ना पसंद है। वर्ल्ड सीरीज में भी, मेरा फोकस बस अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर था। पैरालंपिक्स तो बाद में आएंगे। चूंकि, एशियन गेम्स पहले हो रहे हैं, इसलिए मेरा मुख्य फोकस अभी उन्हीं पर है।”

 

शीतल ने वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज इवेंट में सिल्वर मेडल जीता था। यह 2026 का पहला आउटडोर इंटरनेशनल इवेंट था। इस इवेंट में उनकी हमवतन पायल नाग ने फाइनल में 139-136 के स्कोर के साथ गोल्ड मेडल जीता था।

 

जब शीतल देवी से जापान में होने वाले पैरा एशियन गेम्स की तैयारियों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने जवाब दिया, “अब तक, ट्रेनिंग अच्छी चल रही है।”

 

वहीं, कोच गौरव शर्मा ने कहा, “तैयारियां अच्छी चल रही हैं। इस साल अब तक शीतल ने लगातार मुकाबले नहीं खेले हैं, लेकिन उनका प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है। पहले या दूसरे स्थान पर आना तो खेल का ही एक हिस्सा है। यह बहुत अच्छी बात है कि गोल्ड मेडल भारत के ही खाते में आया। पायल, शीतल को अपना आदर्श मानती हैं, इसलिए उनसे हारना भी गर्व की बात है, क्योंकि वह भी हमारी ही हमवतन भारतीय खिलाड़ी हैं।”

 

उन्होंने आगे कहा, “यह एक अच्छी बात है कि एशियन गेम्स से पहले ही हमें यह एहसास हो गया है कि भारत के अंदर भी हमारा मुकाबला बहुत कड़ा है। अक्सर खिलाड़ियों को लगता है कि उनका मुकाबला सिर्फ विदेशी खिलाड़ियों से है, लेकिन यह एक सकारात्मक बात है कि हमें भारत के अंदर ही इतना कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। इससे एशियन गेम्स के लिए हमारा फोकस और बढ़ेगा।”

 

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