July 27, 2026
Entertainment

पारितोष त्रिपाठी ने पिता को याद कर पोस्ट किया भावुक नोट, लिखा- आज जो भी हूं, आपकी वजह से हूं

Paritosh Tripathi shared an emotional note remembering his father, writing, “Whatever I am today, I am because of you.”

अभिनेता पारितोष त्रिपाठी ने अपने पिता प्रोफेसर रामायण तिवारी को याद करते हुए सोमवार को सोशल मीडिया के जरिए उनके लिए खास पोस्ट शेयर किया। इसमें उन्होंने पिता का जीवन से चले जाने की तुलना मेले में बिछडे़ हुए बच्चे से की।

उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपने पिता की कुछ तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, “पापा, आपको गए हुए नौ साल बीत गए। साल बीत जाने का कुछ पता नहीं चलता है, वैसे ही अभी भी समझ नहीं आता है कि आप हमारे बीच नहीं हैं। आपका इतनी जल्दी जाना जरूरी तो नहीं था। जिंदगी में अभी आपको और बहुत कुछ देखना बाकी था। आज हर अच्छे और बुरे मौके पर हम सब आपको अपने बिना देखते हैं और यह सब सहना बहुत मुश्किल होता है।”

उन्होंने उस कॉल को याद किया, जब उनके पिता का निधन हो गया था। अभिनेता ने लिखा, “हर इंसान उस कॉल से घबराता है और वो एक दिन हर किसी के हिस्से में जरूर आती है। जुलाई 2017 की बात है, जब एक कॉल आई और फोन के उस पार की चुप्पी, किसी के बिलखने की आवाज और जब तक आप उस कॉल को समझ पाते हैं, तब तक सब कुछ भूतकाल हो चुका होता है। पिता का ना होना ठीक वैसा ही होता है, जैसे मेले में किसी बच्चे का हाथ छूटना। इस दुनिया के मेले में बच्चा हाथ खोज रहा है। हर साल यादों की भीड़ बढ़ती जाती है और हाथ ओझल हो रहा होता है।”

उन्होंने लिखा, “समय के हिसाब से आपके बेटे का हाथ मजबूत हो रहा है, उंगलियां शब्दों को पिरोना सीख रही हैं, लेकिन अंदर से आपका बेटा जोर-जोर से रो रहा है ताकि बच्चे की आवाज मेले को चीर कर पापा तक पहुंच सके। आपको तो पता तो होगा ही, फिर भी लिख के बता रहा हूं। बाबा कहने वाली पोती हुई है, धीरे से जब उसका रोना सुनता हूं, तो आंख खुल जाती है, जैसे आप मेरे बचपन में जागते होंगे। सब कुछ छोड़कर, हर मौके पर, हर मोड़ पर निरंतर कुछ ना कुछ सिखलाते रहे होंगे। मीशा (पारितोष की बेटी) बोलने लगी है, ‘मां, पापा, बाबा, जय जय,’ और काफी कुछ बोलती है। नहाकर पूजा करने जाता हूं तो घंटी की आवाज से भाग के आती है। उसकी विद्या आरंभ होगी तो पहला अक्षर मैं लिख के सिखाऊंगा और उसके बाद मेरे हाथ से कोई और अक्षर नहीं लिखा जाएगा।

उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि वे अपनी बेटी को जरूर बताएंगे; उनके बाबा अंग्रेजी के बड़े विद्वान थे और संस्कृत के पंडित। उन्होंने लिखा, “काश मीशा को उसके बाबा पहला अक्षर लिखना और बोलना वो सिखाते। मुझे एहसास है कि पिता आप हमारे पास हैं, जिसे मैं महसूस कर सकता हूं। आज जो हूं आपसे हूं…और सब ठीक है, पापा, यात्रा चल रही है, अभिनय यात्रा भी और जीवन यात्रा भी।”

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