September 7, 2026
World

उथल-पुथल भरे दौर में लक्जमबर्ग के साथ साझेदारी अहम : एस जयशंकर

Partnership with Luxembourg crucial during turbulent times: S. Jaishankar

 

नई दिल्ली, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को लक्जमबर्ग के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री जेवियर बेटेल के साथ बैठक की। बाद में दोनों ने संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए द्विपक्षीय संबंधों को लेकर हुई प्रगति की जानकारी दी। जयशंकर ने लक्जमबर्ग के साथ साझेदारी को बेहद अहम बताया।

 

विदेश मंत्री ने मुलाकात की कुछ झलकियां साझा करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “आज नई दिल्ली में लक्जमबर्ग के उप प्रधानमंत्री (डीपीएम) और विदेश मंत्री जेवियर बेटेल का स्वागत करते हुए खुशी हो रही है। दुनिया भर में अनिश्चितता और उथल-पुथल के दौर में भारत और लक्जमबर्ग जैसी भरोसेमंद साझेदारियां बहुत अहम हो गई हैं।”

उन्होंने आगे लिखा, “हमने व्यापार, निवेश, फिनटेक, स्टार्टअप, क्लीन टेक, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य, शिक्षा और मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में आपसी सहयोग पर अहम बातचीत की। साथ ही, वैश्विक घटनाक्रमों और बहुपक्षीय सहयोग पर भी चर्चा हुई। हमारी साझेदारी और भारत-ईयू के बीच मजबूत रिश्तों को लेकर डीपीएम बेटेल के समर्थन की हम दिल से सराहना करते हैं।”

इससे पहले हैदराबाद हाउस में बेटेल का स्वागत करते हुए जयशंकर ने कहा, “भारत में आपका और आपके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। आपकी यह यात्रा हमारे बीच बढ़ती और गहरी होती साझेदारी को दिखाती है।”

विदेश मंत्री ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का समर्थन करने के ल‍िए धन्‍यवाद द‍िया। उन्होंने कहा क‍ि मैं इस अवसर पर आपको और लक्जमबर्ग को मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए दिए गए मजबूत समर्थन के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। आपकी मदद से हम इस समझौते को अंतिम चरण तक पहुंचाने में सफल रहे और अब यह लागू होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

वहीं, लक्जमबर्ग के विदेश मंत्री ने कहा, “आप (विदेश मंत्री) और प्रधानमंत्री मोदी के बारे में मुझे जो बात पसंद है, वह यह है कि जब आप कुछ कहते हैं, तो आप उसे करते भी हैं, और इस बात की बहुत तारीफ की जाती है… मैंने इसे कोविड के समय देखा जब हम मिलकर कुछ प्रोजेक्ट कर रहे थे। आपके प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हम इसे करने जा रहे हैं’। आमतौर पर, जब हम यूरोप में ऐसा कहते हैं, तो यह चर्चा की शुरुआत होती है कि हम उस वादे को कैसे पूरा कर सकते हैं। भारत में, यह शुरुआत थी लेकिन अंत भी था क्योंकि अगले ही दिन सब कुछ हो गया था। यही वजह है कि मैं आपके राजनीतिक बयानों की कार्यक्षमता से भी प्रभावित हुआ।”

 

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