June 24, 2026
National

‘पशुपति सील’ विवाद: भक्त चरणदास महाराज बोले- सनातन सभ्यता के प्रमाणों को नकारना गलत

‘Pashupati Seal’ Controversy: Bhakt Charan Das Maharaj Says—Denying Evidence of Sanatan Civilization Is Wrong

नासिक के भक्त चरणदास महाराज ने 4300 साल पुरानी ‘पशुपति सील’ को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अमेरिकी इतिहासकार ऑड्रे ट्रुश्के की ओर से ‘पशुपति सील’ पर उठाए गए सवाल को गलत ठहराया है और कहा कि भारत की सनातन संस्कृति व सभ्यता हजारों साल पुरानी है। इसके समर्थन में पर्याप्त ऐतिहासिक और पुरातात्विक प्रमाण मौजूद हैं।

भक्त चरणदास महाराज ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “भारत की सनातन संस्कृति और सभ्यता हजारों साल पुरानी है और इसके समर्थन में पर्याप्त ऐतिहासिक और पुरातात्विक प्रमाण मौजूद हैं।” उन्होंने आगे कहा कि भारतीय परंपरा में ‘पशुपति सील’ को लंबे समय से भगवान शिव के पशुपतिनाथ स्वरूप से जोड़ा जाता रहा है, और विदेशी इतिहासकारों की ओर से ऐसे सांस्कृतिक प्रतीकों और मान्यताओं पर सवाल उठाना अनुचित है।

उन्होंने कहा कि सनातन सभ्यता किसी न किसी रूप में पूरे विश्व से जुड़ी हुई है। समय-समय में संस्कृति बदली और लोग उसी तरह से उसे मानने लगे, लेकिन ‘पशुपति सील’ मिलने के बाद यह साफ हो जाता है कि हड़प्पा सभ्यता हमारी प्राचीन संस्कृति थी। इसलिए अमेरिकी इतिहासकार का दावा बिल्कुल गलत है।

दरअसल, भारत के संस्कृति मंत्रालय ने बीते दिनों एक प्राचीन सील की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की थी। इसके साथ ही, मंत्रालय ने लिखा कि इसमें योग मुद्रा में बैठी आकृति भगवान शिव के आदि स्वरूप ‘पशुपति’ को दर्शाती है।

मंत्रालय ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “अविभाजित भारत के मोहनजोदड़ो में खोजी गई लगभग 4,300 वर्ष पुरानी यह स्टीटाइट मुहर एक योगमुद्रा में बैठे पुरुष की आकृति को दर्शाती है, जिसे व्यापक रूप से ‘शिव-पशुपति’ के रूप में देखा जाता है। यह आकृति मूलबंधासन में विराजमान है और इसके चारों ओर विभिन्न पशु अंकित हैं। भले ही प्राचीन स्थल आज की सीमाओं के पार स्थित हों, भारत इस विरासत का जीवंत संरक्षक बना हुआ है। ‘पशुपति सील’ में दिखाई देने वाली योग मुद्रा, शैव प्रतीकवाद और आध्यात्मिक भावना आज भी भारत के मंदिरों, शिव की दैनिक पूजा, योग परंपराओं और सांस्कृतिक जीवन में जीवंत रूप से विद्यामान हैं।”

इसके बाद अमेरिकी इतिहासकार ऑड्रे ट्रुश्के की ओर से हड़प्पा सभ्यता की ‘पशुपति सील’ को भगवान शिव से जोड़ने वाले दावे पर सवाल उठाए गए। अमेरिकी इतिहासकार ऑड्रे ट्रुश्के ने ‘एक्स’ पोस्ट में दावा किया कि यह आकृति शिव की नहीं है।

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