सोमवार को शिमला में संपन्न हुई हिमाचल प्रदेश राज्य शतरंज चैंपियनशिप-2026 में पायल और हर्षल ने क्रमशः लड़कियों और लड़कों के ओपन वर्ग में स्वर्ण पदक जीते। वहीं, शिवांशी और विशाल ने शतरंज में असाधारण कौशल का प्रदर्शन करते हुए इन्हीं वर्गों में रजत पदक जीते।
अंडर-12 वर्ग (लड़कियों) में दिव्यांशी प्रथम, आनवी द्वितीय और यशस्वी तृतीय स्थान पर रहीं, जबकि अंडर-14 वर्ग (लड़कियों) में स्नेहा ने स्वर्ण, माही ने रजत और संस्कृति ने कांस्य पदक जीता। इसी प्रकार, अंडर-10 वर्ग (लड़कों) में अथर्व ने स्वर्ण पदक, सहस्रद ने रजत पदक और आरव कियान ने कांस्य पदक जीता। अंडर-14 वर्ग (लड़कों) में आदित्य प्रथम, आरव द्वितीय और पार्थ तृतीय स्थान पर रहे। अंडर-19 वर्ग (लड़कों) में सिद्धार्थ ने स्वर्ण पदक, मोक्ष ने रजत पदक और हार्दिक ने कांस्य पदक जीता।
इस चैंपियनशिप में हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों के प्रतिभाशाली खिलाड़ी शामिल हुए, जिन्होंने जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं के माध्यम से क्वालीफाई किया था। चैंपियनशिप ने उन्हें अपने कौशल का प्रदर्शन करने और राज्य स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं के माध्यम से क्वालीफाई करने वाले 27 खिलाड़ियों ने राज्य चैंपियनशिप में भाग लिया। चैंपियनशिप के दौरान राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी और कोच भी उपस्थित थे, जिससे चैंपियनशिप का महत्व और बढ़ गया और खेल अनुभव के आदान-प्रदान के अवसर मिले।
इस चैंपियनशिप का उद्देश्य स्कूली छात्रों और युवा खिलाड़ियों के बीच शतरंज को प्रोत्साहित करना, उभरती प्रतिभाओं की पहचान करना और उनका पोषण करना, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और शिक्षा और खेल के बीच संबंधों को मजबूत करना था।
हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग की पूर्व सदस्य अंजू शर्मा समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं। उन्होंने प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा कि शतरंज युवाओं को स्वतंत्र रूप से सोचने, चुनौतियों का सामना करने, गलतियों से सीखने और उपलब्ध संसाधनों का बुद्धिमानी से उपयोग करने के अवसर प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा को केवल पाठ्यपुस्तकों के ज्ञान और परीक्षा परिणामों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, “इससे आत्मविश्वास, रचनात्मकता, जिम्मेदारी, विवेक, सहनशीलता और वास्तविक जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता भी विकसित होनी चाहिए।”
बीएस चौहान ने शतरंज के ऐतिहासिक विकास, इसकी बौद्धिक परंपराओं और समकालीन शिक्षा के लिए इसकी प्रासंगिकता पर अपने विचार साझा किए। चैम्पियनशिप के मुख्य समन्वयक अजय वर्मा ने विद्यालय, महाविद्यालय और सामुदायिक स्तर पर शतरंज को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला ताकि अधिक से अधिक छात्र इस बौद्धिक खेल से लाभान्वित हो सकें।


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