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दिल्ली के जनजातीय सम्मेलन में प्रतिभागियों ने कहा- लोगों को अपनी संस्कृति प्रदर्शित करने पर गर्व होना चाहिए

People should be proud to showcase their culture, say participants at Delhi's tribal conference

दिल्ली में आयोजित भव्य ‘जनजाति सांस्कृति समागम’ में देशभर से पहुंचे जनजातीय समुदायों के लोगों ने अपनी संस्कृति, परंपरा और पहचान पर गर्व जताया। लाल किला परिसर और उसके आसपास आयोजित इस विशाल कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों ने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी संस्कृति को गर्व के साथ दुनिया के सामने प्रस्तुत करना चाहिए।

‘धरती आबा’ बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस मेगा सांस्कृतिक आयोजन में देशभर के 550 से अधिक जनजातीय समुदायों के करीब 1.5 लाख प्रतिनिधियों के शामिल होने का अनुमान लगाया गया था।

कार्यक्रम में शामिल उत्तराखंड से आई एक महिला प्रतिभागी ने कहा कि अपने 40 साल के जीवन में उन्होंने इतना बड़ा जनजातीय आयोजन पहली बार देखा है। पारंपरिक वेशभूषा में सजी इस महिला ने कहा, “हर किसी को अपनी संस्कृति दिखाने और उस पर गर्व करने का अधिकार होना चाहिए।”

एक अन्य जनजातीय महिला ने खुशी जताते हुए कहा कि इस कार्यक्रम का हिस्सा बनकर उन्हें बेहद अच्छा महसूस हो रहा है। उन्होंने कहा, “हम यहां आकर बहुत खुश हैं। हम लाल किला भी देखने जाएंगे।” महिला प्रतिभागी ने बताया कि देशभर से आए लोग केवल कार्यक्रम देखने नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के समर्थन और उनकी समस्याओं को उठाने के उद्देश्य से यहां पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि सभी लोग जनजातीय समुदाय के अधिकारों और संरक्षण के लिए एकजुट होकर आवाज उठा रहे हैं।

कार्यक्रम में शामिल एक अन्य प्रतिभागी ने कहा कि इस आयोजन का सबसे बड़ा उद्देश्य देशभर के जनजातीय समाज को एक मंच पर लाना है। उन्होंने कहा, “हम अलग-अलग क्षेत्रों और भाषाओं के लोगों से मिल रहे हैं। यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है और व्यवस्थाएं भी काफी अच्छी की गई हैं।”

एक प्रतिभागी ने कहा कि भारत में लगभग 750 जनजातीय समुदाय हैं और उनमें से 550 से अधिक समुदायों के लोग इस समागम में पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है मानो ‘मिनी इंडिया’ एक जगह इकट्ठा हो गया हो। उन्होंने बताया कि यहां अलग-अलग जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपराएं, पहनावा, बोली, भाषा, वाद्य यंत्र और जीवनशैली देखने को मिल रही है। उनका कहना था कि पूरे देश को यह देखना चाहिए कि जनजातीय समाज किस तरह अपनी संस्कृति और परंपराओं को बचाने का काम कर रहा है।

वहीं, कार्यक्रम में शामिल भाजपा नेताओं ने भी इसे ‘एकजुट भारत’ की संस्कृति और जनजातीय एकता का बड़ा उत्सव बताया।

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