May 25, 2026
National

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर हुई, कांग्रेस-आप ने सरकार पर साधा निशाना

Petrol and diesel prices rise again, Congress and AAP target the government

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में सोमवार को एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पेट्रोल की कीमतों में 2.61 रुपए प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। पिछले 10 दिनों में यह चौथी बार है जब ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं। बढ़ती कीमतों को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है और इसे आम जनता, किसानों और छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ बताया है।

झज्जर में समाचार एजेंसी आईएएनएस से खास बातचीत में कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि लगातार चौथी बार कीमतें बढ़ी हैं, जिससे महंगाई और बढ़ रही है। बढ़ती कीमतों का सीधा असर किसानों और आम लोगों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि चंडीगढ़ में तय मात्रा में ईंधन देने की बात कही गई है।

उन्होंने कहा कि खाने-पीने की चीजों से लेकर रेस्टोरेंट तक का खर्च बढ़ रहा है और इसका असर सामाजिक गतिविधियों पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कई जगहों पर लोगों द्वारा लगाए जाने वाले लंगर भी प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से इस मुद्दे को गंभीरता से लेने की मांग करते हुए कहा कि केवल साइकिल चलाकर प्रदर्शन करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। सरकार ‘वर्क फ्रॉम होम’ की बात करती है, लेकिन डिलीवरी और परिवहन से जुड़े लोग ऐसा नहीं कर सकते, इसलिए सरकार को उनकी परेशानियों पर भी ध्यान देना चाहिए।

वहीं, रोहतक में आम आदमी पार्टी के नेता अनुराग ढांडा ने कहा कि पिछले 10 दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में करीब 7.5 रुपए की बढ़ोतरी हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हर दिन थोड़ी-थोड़ी बढ़ोतरी कर आम लोगों पर बोझ डाल रही है। अनुराग ढांडा ने कहा कि अगर यही सिलसिला जारी रहा तो पेट्रोल की कीमत 150 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच सकती है, जिससे आम लोगों के लिए वाहन चलाना मुश्किल हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि बाइक चलाने वाले गरीब लोग पेट्रोल नहीं भरवा पाएंगे और ऑटो से लेकर ट्रक ड्राइवर तक सभी परेशान हैं। उनके मुताबिक बढ़ती ईंधन कीमतों का असर व्यापार और रोजमर्रा के खर्चों पर साफ दिखाई दे रहा है, जिससे आम जनता की आर्थिक मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।

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