June 25, 2026
Entertainment

मशहूर गायिका सुमन कल्याणपुर के निधन पर पीएम मोदी ने जताया शोक, बोले- भारतीय संगीत को समृद्ध बनाया

PM Modi expressed grief over the demise of famous singer Suman Kalyanpur, saying – she enriched Indian music

भारतीय संगीत जगत की मशहूर गायिका सुमन कल्याणपुर का उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण रविवार को मुंबई स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। इस दुखद खबर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने गायिका के साथ अपनी एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “प्रसिद्ध गायिका सुमन कल्याणपुर के निधन की खबर सुनकर गहरा दुख हुआ। उनकी मधुर आवाज और भावपूर्ण गायकी ने भारतीय संगीत और सांस्कृतिक जगत को समृद्ध बनाया।”

पीएम ने लिखा, “उन्होंने अपने गीतों के जरिए संगीत प्रेमियों और भारतीय सिनेमा के प्रशंसकों के दिलों में एक खास जगह बनाई। उनके परिवार, शुभचिंतकों और प्रशंसकों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें। ऊं शांति।”

बता दें कि 89 वर्ष की आयु में निधन होने के बाद सुमन कल्याणपुर का अंतिम संस्कार 1 जून को मुंबई में किया जाएगा।

सुमन कल्याणपुर भारतीय संगीत जगत की उन गायिकाओं में से एक थीं, जिन्होंने भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम दौर को अपनी गायकी से यादगार बना दिया। उन्होंने कई सदाबहार गीतों को अपनी आवाज से अमर बनाया और संगीत प्रेमियों के दिलों में एक खास पहचान स्थापित की। उनकी आवाज की मिठास और सुरों की गहराई ने उन्हें भारतीय फिल्म संगीत की सबसे सम्मानित गायिकाओं में शामिल किया।

उनके लोकप्रिय गीतों में ‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे’, ‘ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे’ और ‘तुमने पुकारा और हम चले आए’ जैसे गीत शामिल हैं। सुमन कल्याणपुर ने अपने करियर की शुरुआत मराठी फिल्म ‘पसंत आहे मुलगी’ से की थी। उनका पहला सुपरहिट मराठी गीत ‘भातुकलीच्या खलमांडिला’ माना जाता है। वर्ष 1960 और 1970 का दशक उनके करियर का स्वर्णिम काल था। लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी के बीच हुए मतभेद के दौरान सुमन कल्याणपुर ने रफी के साथ 140 से अधिक लोकप्रिय युगल गीत गाए।

सुमन कल्याणपुर ने हिंदी, मराठी और अन्य भाषाओं में 740 से अधिक गीत गाए। उनकी आवाज इतनी मधुर और लता मंगेशकर से मिलती-जुलती थी कि कई बार श्रोता भ्रमित हो जाते थे। उन्हें महाराष्ट्र सरकार सहित विभिन्न संस्थाओं द्वारा कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

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