August 25, 2026
Entertainment

सिंटा विवाद पर पूनम ढिल्लो और पद्मिनी कोल्हापुरे बोलीं-‘तानाशाही होती तो 8 लोगों की सहमति क्यों जरूरी होती’

Poonam Dhillon and Padmini Kolhapure spoke on the CINTAA controversy, asking, “If it were a dictatorship, why would the consent of eight people be necessary?”

सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (सिंटा) के भीतर चल रहा विवाद अब और गहराता जा रहा है। संस्था की अध्यक्ष पूनम ढिल्लो और वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद्मिनी कोल्हापुरे ने पूर्व महासचिव उपासना सिंह की ओर से लगाए गए आरोपों पर खुलकर जवाब दिया है। उपासना ने दोनों वरिष्ठ अभिनेत्रियों पर संस्था को कथित तौर पर तानाशाही और गैर लोकतांत्रिक तरीके से चलाने का आरोप लगाया था।

अब पूनम और पद्मिनी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन आरोपों को खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा। जहां पूनम ने कहा कि आरोपों से सिंटा की छवि को नुकसान पहुंचा है, वहीं पद्मिनी ने सवाल किया कि अगर संस्था पर उनका और पूनम का पूरा नियंत्रण होता तो एग्जीक्यूटिव कमेटी में मौजूद इतने वरिष्ठ कलाकारों के बीच फैसले कैसे लिए जाते।

सिंटा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में पद्मिनी कोल्हापुरे ने सबसे पहले उस आरोप पर जवाब दिया, जिसमें उन्हें और पूनम ढिल्लो को संस्था में तानाशाही चलाने वाला बताया गया था। पद्मिनी ने कहा, ”सिंटा की एग्जीक्यूटिव कमेटी में फैसले किसी एक व्यक्ति की मर्जी से नहीं लिए जाते। किसी भी बैठक को शुरू करने के लिए पहले आठ सदस्यों का कोरम पूरा होना जरूरी है। इसके बाद ही बैठक शुरू होती है और अगर किसी मुद्दे पर फैसला लेना हो तो उसे बहुमत के आधार पर तय किया जाता है।”

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, ”मैं सिंटा में अकेले खड़ी होकर यह फैसला भी नहीं कर सकती कि हमें प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी है। इस तरह के फैसले भी कमेटी की बैठक में चर्चा के बाद लिए जाते हैं।”

इसके बाद पद्मिनी ने उन आरोपों पर सवाल उठाया, जिनमें कहा गया था कि कमेटी के सदस्य पूनम या उनके दबाव में काम करते हैं। उन्होंने सिंटा से जुड़े वरिष्ठ कलाकारों का नाम लेते हुए कहा, ”क्या पिंटू जी, राकेश बेदी, यशपाल शर्मा जैसे अनुभवी कलाकार किसी के कहने पर आंख बंद करके चल सकते हैं? इतने वरिष्ठ कलाकारों वाली कमेटी में क्या दो लोग तानाशाही चला सकते हैं।”

पद्मिनी ने सिंटा की मौजूदा कमेटी की वैधता को लेकर कहा, ”मैं एक बार फिर स्पष्ट करना चाहती हूं कि यह कमेटी पूरी तरह कानूनी है। कमेटी को भंग नहीं किया गया है। इसे खत्म नहीं किया गया है और हम संविधान के अनुसार काम कर रहे हैं। इस कमेटी से जुड़े सभी लोगों का उद्देश्य सिंटा के सदस्यों के हित में काम करना है। हम सभी यहां सिंटा के सदस्यों के लिए अच्छा काम करने आए हैं।”

वहीं, सिंटा की अध्यक्ष पूनम ढिल्लो ने भी उपासना सिंह के आरोपों पर गहरी नाराजगी और दुख जताया। पूनम ने कहा, ”पिछली कमेटी और उसकी महासचिव की ओर से सिंटा के बारे में जिस तरह की बातें की गईं, उससे संस्था की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। संस्था के इतिहास में पहले कभी उसके बारे में इस तरह की गलत बातें नहीं कही गईं, इसलिए मैं इस बात से बहुत दुखी हूं।”

उन्होंने कहा, ”हमें कुछ चीजें साफ करनी हैं क्योंकि जब तक सही पक्ष लोगों तक नहीं पहुंचता, तब तक लोग यही सोचेंगे कि जो बातें कही जा रही हैं, वही सच हैं।”

दरअसल, यह विवाद इस महीने उस समय तेज हो गया जब सिंटा की 21 सदस्यीय एग्जीक्यूटिव कमेटी के 11 सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया। इनमें आठ निर्वाचित सदस्य थे। इस्तीफा देने वालों में हेमंत पांडे, मुकेश ऋषि, साहिला चड्ढा, हेतल परमार, पुनीत इस्सर, विंदू दारा सिंह, विकास वर्मा और दीपक पराशर शामिल थे। इस्तीफा देने वाले सदस्यों ने संस्था के कामकाज पर भरोसा कम होने की बात कही और नए चुनाव कराने की मांग उठाई।

उस समय सिंटा की महासचिव रहीं उपासना सिंह ने इस्तीफों की पुष्टि करते हुए दावा किया था कि सदस्यों ने पूनम ढिल्लो और पद्मिनी कोल्हापुरे के खिलाफ शिकायतें की हैं। इन शिकायतों में पदों के कथित दुरुपयोग, फैसले लेने में निष्पक्षता की कमी और एग्जीक्यूटिव कमेटी से पर्याप्त सलाह न लेने जैसे आरोप शामिल थे। आधिकारिक बातचीत और वित्त से जुड़े मामलों को संभालने के तरीके पर भी सवाल उठाए गए थे।

उपासना सिंह ने पूनम और पद्मिनी पर संस्था को कथित तौर पर गैर-लोकतांत्रिक तरीके से चलाने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया कि जो सदस्य दोनों वरिष्ठ अभिनेत्रियों से सहमत नहीं होते या उनके सामने ‘यस मैडम’ नहीं कहते, उन्हें कारण बताओ नोटिस दिए जाते थे। उपासना और सिंटा के पूर्व कोषाध्यक्ष दीपक पराशर ने यह भी आरोप लगाया कि संस्था के नेतृत्व की ताकत धीरे-धीरे पूनम और पद्मिनी के आसपास केंद्रित हो गई थी।

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