July 13, 2026
Entertainment

प्रकाश मेहरा बर्थडे स्पेशल: चंद पैसों से मायानगरी में बनाई अपनी पहचान, अमिताभ बच्चन पर से हटाया था फ्लॉप का टैग

Prakash Mehra Birthday Special: Carved a niche for himself in the City of Dreams with meager funds; shed the ‘flop’ tag from Amitabh Bachchan.

हिंदी सिनेमा की दुनिया में कुछ नाम ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान सिर्फ उनकी फिल्मों से नहीं बल्कि उनके संघर्षों से भी होती है। ऐसे ही एक नाम थे मशहूर निर्माता-निर्देशक प्रकाश मेहरा। आज भले ही उन्हें बॉलीवुड के सबसे सफल फिल्मकारों में गिना जाता है, लेकिन उनकी शुरुआत बेहद मुश्किल हालातों में हुई थी। वह कभी सिर्फ 13 रुपए लेकर मुंबई पहुंचे थे। मायानगरी में पहचान बनाने के लिए उन्होंने छोटे-मोटे काम किए, नाई की दुकान पर काम किया और कई परेशानियों का सामना किया। कुछ कर दिखाने की जिद ने उन्हें हिंदी सिनेमा का बड़ा नाम बना दिया।

प्रकाश मेहरा का जन्म 13 जुलाई 1939 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर में हुआ था। बचपन से ही उन्हें संगीत और फिल्मों में काफी रुचि थी। उनके जीवन की शुरुआत आसान नहीं रही। बचपन में ही उनकी मां का निधन हो गया था और पिता ने भी गृहस्थ जीवन से दूरी बना ली थी। ऐसे हालात में उनका पालन-पोषण रिश्तेदारों के बीच हुआ। फिल्मों के प्रति लगाव के चलते उन्होंने छोटी उम्र में ही मुंबई आने की ठान ली थी।

कहा जाता है कि प्रकाश मेहरा जब किशोर उम्र में थे, तब वह अपने सपनों को पूरा करने के लिए घर से निकल पड़े। उनके पास सिर्फ 13 रुपए थे। उस समय मुंबई पहुंचना और फिल्म इंडस्ट्री में जगह बनाना आसान नहीं था। शुरुआती दिनों में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। काम की तलाश में भटकने के बाद उन्होंने गुजारे के लिए छोटे-मोटे काम किए। यहां तक कि उन्होंने नाई की दुकान पर भी काम किया लेकिन उनके मन में हमेशा फिल्म बनाने का सपना जिंदा रहा।

संघर्ष के दिनों में उनकी मुलाकात फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कुछ लोगों से हुई और धीरे-धीरे उन्हें फिल्मों में काम मिलने लगा। उन्होंने शुरुआत में प्रोडक्शन कंट्रोलर के तौर पर काम किया। इसके बाद उन्होंने सहायक निर्देशक के रूप में भी काम किया। फिल्मी दुनिया को करीब से समझने के बाद उन्होंने निर्देशन की तरफ कदम बढ़ाया।

साल 1968 में प्रकाश मेहरा ने बतौर निर्देशक फिल्म ‘हसीना मान जाएगी’ से अपने करियर की शुरुआत की। यह फिल्म सफल रही और इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने ‘मेला’, ‘समाधि’ और ‘आन-बान’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया, जिन्हें दर्शकों ने काफी पसंद किया। उनके करियर की सबसे बड़ी फिल्म साल 1973 में रिलीज हुई ‘जंजीर’ साबित हुई। इस फिल्म ने हिंदी सिनेमा का इतिहास बदल दिया।

उस समय अमिताभ बच्चन की लगातार कई फिल्में सफल नहीं हो रही थीं, और उन्हें फ्लॉप अभिनेता माना जाने लगा था। लेकिन प्रकाश मेहरा ने उन पर भरोसा जताया और उन्हें ‘जंजीर’ में मौका दिया। फिल्म की सफलता ने अमिताभ बच्चन को रातोंरात बड़ा स्टार बना दिया और उनकी पहचान ‘एंग्री यंग मैन’ के रूप में बनी।

‘जंजीर’ के बाद प्रकाश मेहरा और अमिताभ बच्चन की जोड़ी ने कई यादगार फिल्में दीं। इनमें ‘हेरा फेरी’, ‘खून पसीना’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘लावारिस’, ‘नमक हलाल’ और ‘शराबी’ जैसी सुपरहिट फिल्में शामिल हैं। इन फिल्मों ने दोनों को हिंदी सिनेमा में खास मुकाम दिलाया।

प्रकाश मेहरा सिर्फ निर्देशन तक सीमित नहीं रहे बल्कि उन्होंने कई फिल्मों का निर्माण भी किया। उन्होंने ‘दलाल’, ‘जिंदगी एक जुआ’ और ‘बाल ब्रह्मचारी’ जैसी फिल्मों का भी निर्माण किया। साल 2006 में उन्हें इंडिया मोशन पिक्चर डायरेक्टर्स एसोसिएशन की ओर से लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया गया। इसके अलावा उन्हें निर्माता के तौर पर भी लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान मिला।

प्रकाश मेहरा का निधन 17 मई 2009 को मुंबई में हुआ। वह 69 साल के थे। बीमारी के चलते उनका निधन हुआ लेकिन उनकी बनाई फिल्में आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय हैं।

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