July 22, 2026
Entertainment

प्रीति जिंटा ने सोनम वांगचुक के समर्थन में उठाई आवाज, सरकार से की बातचीत की अपील

Preity Zinta raises her voice in support of Sonam Wangchuk, appeals to the government for dialogue.

बॉलीवुड अभिनेत्री प्रीति जिंटा फिल्मों के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों पर भी राय रखने के लिए जानी जाती हैं। इस कड़ी में उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर चल रहे आंदोलन पर प्रतिक्रिया दी। प्रीति ने एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के समर्थन में आवाज उठाते हुए सरकार से उनके साथ बातचीत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक की सेहत लगातार खराब हो रही है और ऐसे में किसी समाधान तक पहुंचने के लिए बातचीत जरूरी है।

प्रीति जिंटा ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए सरकार से बातचीत शुरू करने की अपील की। उन्होंने लिखा, ”मुझे उम्मीद है कि सरकार सोनम वांगचुक और छात्र संगठनों के साथ बातचीत करेगी, ताकि उनकी तबीयत और ज्यादा खराब न हो।”

अपने पोस्ट में प्रीति ने सोनम वांगचुक से अपना अनशन खत्म करने की अपील की। उन्होंने लिखा, ”सोनम, प्लीज अपना अनशन खत्म करें। आपकी सेहत भी इस लड़ाई जितनी ही जरूरी है।” अभिनेत्री ने लिखा, ”सोनम वांगचुक और छात्र भारत के भविष्य और युवाओं के लिए आवाज उठा रहे हैं। हमारी शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और अपग्रेड करने की लड़ाई में मेरा दिल से समर्थन है। आप सभी को और ताकत मिले।”

दरअसल, सोनम वांगचुक नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के विरोध में अनशन कर रहे हैं। उनके आंदोलन को लेकर देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। राजधानी दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में छात्रों और प्रदर्शनकारियों ने मांगों को लेकर आवाज उठाई है।

सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर उस समय मामला और ज्यादा चर्चा में आया, जब दिल्ली पुलिस ने उन्हें जंतर-मंतर से हटाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 18 जुलाई की सुबह पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाकर अस्पताल पहुंचाया था। पुलिस ने यह कदम उनकी बिगड़ती तबीयत, डॉक्टरों की सलाह और दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए उठाया।

सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार से शिक्षा व्यवस्था में सुधार और प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर अपनी मांगें रखी हैं। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी की है। उनका कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

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