सिमरत शर्मा
चंडीगढ़ 30 जनवरी | सहकारी आवास समितियों में 1 प्रतिशत की रियायती स्टांप शुल्क दर पर व्यक्तिगत नामों में भूखंडों और फ्लैटों के पंजीकरण की 31 जनवरी की समय सीमा नजदीक आने के साथ, संपत्ति मालिक इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि सरकार की नीति अभी भी “संशोधित” की जा रही है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सरकार इस नीति में संशोधन करने जा रही है ताकि पंजीकरण को पिछले साल नवंबर में नीति अधिसूचित किए जाने के समय की गई घोषणा के विपरीत, भावी आधार पर अनिवार्य बनाया जा सके।
संशोधित नीति को शुक्रवार को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के समक्ष रखे जाने की उम्मीद है, जहां स्टांप शुल्क के पूर्वव्यापी प्रभाव को चुनौती देने वाली याचिकाएं लंबित हैं। सूत्रों के अनुसार, सहकारिता विभाग, जिसने यह नीति तैयार की थी, ने शुरू में इस सुविधा का लाभ उठाने के इच्छुक सभी संपत्ति मालिकों पर 1 लाख रुपये का एकमुश्त शुल्क लगाने पर विचार किया था। विचार-विमर्श के बाद इस प्रस्ताव को रद्द कर दिया गया। इस नीति ने सहकारी आवास समितियों के बीच असंतोष को जन्म दिया है।
मोहाली में स्थित लगभग 600 सहकारी आवास समितियों के करीब 50,000 संपत्ति मालिकों ने कहा कि पंजाब में समितियों को दशकों से अनिवार्य पंजीकरण और स्टांप शुल्क से छूट प्राप्त थी। सदस्यों का तर्क है कि इन छूटों को पूर्वव्यापी रूप से वापस लेने से उन्हें कर-मुक्त व्यवस्था के तहत प्राप्त स्वामित्व को पुनः मान्य कराना पड़ा और प्रभावी रूप से दो बार स्टांप शुल्क का भुगतान करना पड़ा – एक बार स्वामित्व के पंजीकरण के लिए और दूसरी बार बिक्री के समय।
इस बीच, समय सीमा पूरी करने के लिए सैकड़ों मकान मालिक प्रतिदिन तहसील कार्यालयों के बाहर कतार में खड़े हैं। चूंकि कार्यान्वयन संबंधी निर्देश जनवरी के मध्य में ही जिला उपायुक्तों तक पहुंचे, इसलिए कई सोसाइटियों ने रियायती अवधि बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय को ज्ञापन सौंपे हैं।


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