मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गुरुवार को शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) पर अपना हमला दोहराते हुए दावा किया कि आगामी चुनावों से पहले पार्टी भाजपा से गठबंधन के लिए “भीख” मांग रही है। जालंधर के कहलवान गांव में एक लोक मिलनी को संबोधित करते हुए मान ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा और दोनों पार्टियों पर आरोप लगाया कि उनका एजेंडा सिर्फ उनकी सरकार पर हमला करना है। उन्होंने कहा कि आम आदमी सरकार ने जनता की चिंताओं को प्राथमिकता दी है।
एसएडी पर निशाना साधते हुए मान ने कहा कि पार्टी ने गुरुओं की शिक्षाओं को त्याग दिया है और आरोप लगाया कि एक बार लोगों ने उसके चुनाव चिन्ह, तकरी को गुरु नानक के तराजू समझ लिया था। उन्होंने दावा किया कि मतदाताओं को बाद में एहसास हुआ कि पार्टी का चिन्ह केवल “चित्त तौलने” का प्रतीक है, जिसका तात्पर्य मादक पदार्थों से है।
मान ने आरोप लगाया कि एसएडी अब दिल्ली में भाजपा के साथ गठबंधन की कोशिश कर रही है और उसे चाहे जितनी भी सीटें दी जाएं, वह उन्हें स्वीकार करने को तैयार है। किसानों के विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए उन्होंने पार्टी के बदलते राजनीतिक रुख पर सवाल उठाया और पूछा कि क्या आंदोलन के दौरान जान गंवाने वालों को यूं ही भुला दिया जा सकता है।
उन्होंने नांदेड़ में हाल ही में एसएडी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले को लेकर भी उन पर निशाना साधा। मान ने कहा कि ऐसे हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता, साथ ही उन्होंने बाद में बादल को 154 टांके लगने के दावे पर भी सवाल उठाया।
कांग्रेस की ओर मुड़ते हुए मान ने कहा कि पार्टी के नेता आपस में मतभेद होने के बावजूद उनकी आलोचना कर रहे हैं। उन्होंने प्रताप सिंह बाजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा, चरणजीत सिंह चन्नी और अमरिंदर सिंह राजा वारिंग का नाम लेते हुए पार्टी पर रचनात्मक एजेंडा न होने का आरोप लगाया। 2022 के चुनावों को याद करते हुए मान ने सभा को बताया कि मतदाताओं ने कई प्रमुख राजनीतिक परिवारों और नेताओं को हराया था। उन्होंने कहा, “मैंने उन्हें नहीं हराया, आपने हराया।”


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