ऑल हरियाणा पीडब्ल्यूडी मैकेनिकल एम्प्लॉइज़ यूनियन के सदस्यों ने रविवार को राज्य सरकार के ग्रामीण जल संयंत्रों को ग्राम पंचायतों के अधीन रखने के फैसले का विरोध किया।
हरियाणा कर्मचारी महासंघ से संबद्ध यूनियन ने पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत यहां पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग सर्किल कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
सिरसा और फतेहाबाद जिलों के पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शन में भाग लिया।
प्रदर्शन की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष रामकिशन सिरसा और शमशेर कुंडू ने की, जबकि जिला सचिव रामकरण ने कार्यवाही का संचालन किया। राज्य अध्यक्ष नरेंद्र धीमान और महासचिव अमरिक सिंह चत्था ने मुख्य वक्ताओं के रूप में सभा को संबोधित किया। कार्यकारी अभियंता के माध्यम से मुख्यमंत्री को मांगों का ज्ञापन सौंपा गया।
कर्मचारियों को संबोधित करते हुए नरेंद्र धीमान और अमरिक सिंह चथा ने कहा कि ग्रामीण जल परियोजनाओं को ग्राम पंचायतों को सौंपने का सरकार का निर्णय न तो कर्मचारियों के हित में है और न ही जनता के हित में। उन्होंने दावा किया कि पहले भी इसी तरह की व्यवस्था विफल रही थी, क्योंकि पंचायतें न तो जल परियोजनाओं का उचित रखरखाव कर पाईं और न ही गुणवत्तापूर्ण पेयजल सुनिश्चित कर पाईं।
श्रमिक संघ के नेताओं ने सरकार से कर्मचारियों के बीच बढ़ते असंतोष को देखते हुए तत्काल निर्णय वापस लेने का आग्रह किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो ज्ञापन अभियान समाप्त होने के बाद 11 जून को राज्य भर से हजारों कर्मचारी लोक स्वास्थ्य, इंजीनियरिंग और लोक निर्माण (भवन एवं सड़क) मंत्री रणबीर गंगवा के हिसार स्थित आवास का घेराव करेंगे।
कर्मचारियों ने अन्य मांगें भी उठाईं, जिनमें द्वितीय और चतुर्थ श्रेणी के महिला पोस्ट ऑफिसर से तृतीय श्रेणी के पदों पर पदोन्नत कर्मचारियों के लिए 25,500 रुपये के वेतनमान को लागू करना और 2020-23 के लिए एलटीसी जारी करना शामिल है।

