2 अप्रैल । राजस्थान हाई कोर्ट ने गुरुवार को राज्य में पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय चुनाव कराने में हुई देरी को लेकर राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) और राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह को अवमानना नोटिस जारी किया।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.पी. शर्मा की अध्यक्षता वाली एक डिवीन बेंच ने पूर्व विधायक संयम लोढ़ा द्वारा दायर एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
अदालत ने सवाल उठाया कि एसईसी ने मतदाता सूचियों के संशोधन के लिए ऐसा शेड्यूल कैसे जारी किया, जो अदालत द्वारा तय की गई समय सीमा से आगे तक जाता है, जबकि पहले इस संबंध में निर्देश दिए जा चुके थे।
अदालत ने आयोग से चार सप्ताह के अंदर इस मामले पर विस्तृत जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता के वकील पुनीत सिंघवी ने दलील दी कि राज्य सरकार और एसईसी जानबूझकर चुनावों को टाल रहे हैं, जो कि हाई कोर्ट के आदेशों की जानबूझकर की गई अवमानना के बराबर है।
आयोग के शेड्यूल के अनुसार, स्थानीय निकाय चुनावों के लिए अंतिम मतदाता सूची 22 अप्रैल को प्रकाशित की जानी है। यह समय सीमा प्रभावी रूप से 15 अप्रैल तक चुनाव पूरे होने की संभावना को समाप्त कर देती है, जो कि अदालत द्वारा तय की गई समय सीमा थी।
सुनवाई के दौरान, एडवोकेट जनरल राजेंद्र प्रसाद ने बेंच को सूचित किया कि राज्य सरकार चुनाव शेड्यूल को आगे बढ़ाने के लिए एक आवेदन दायर करने का इरादा रखती है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अदालत ने टिप्पणी की, “यह एक ऐसा मामला है जिस पर बाद में विचार किया जाएगा। अभी के लिए, चुनाव आयोग ने ऐसा शेड्यूल कैसे जारी किया?” बेंच ने एसईसी को चार सप्ताह के अंदर इस सवाल का जवाब देने का निर्देश दिया।
14 नवंबर, 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट ने 439 याचिकाओं के एक समूह पर फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह 15 अप्रैल, 2026 तक पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव संपन्न कराए।
अदालत ने यह भी अनिवार्य किया था कि परिसीमन की प्रक्रिया 31 दिसंबर, 2025 तक पूरी कर ली जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए बाद में इस समय सीमा को बरकरार रखा और दोहराया कि चुनाव 15 अप्रैल तक हर हाल में संपन्न कराए जाने चाहिए। इस बीच, इस चरण पर राज्य सरकार को कोई अवमानना नोटिस जारी नहीं किया गया है।

