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भारत के पास 8.5 मिलियन टन से ज्यादा दुर्लभ खनिज भंडार: डॉ. जितेंद्र सिंह

India has reserves of over 8.5 million tonnes of rare earth minerals: Dr. Jitendra Singh

2 अप्रैल । भारत के पास करीब 8.52 मिलियन टन रेयर अर्थ (दुर्लभ खनिज) ऑक्साइड संसाधन हैं, लेकिन इसके बावजूद देश रेयर अर्थ मैग्नेट और इससे जुड़े उत्पादों के लिए आयात पर निर्भर है। इसकी वजह कम गुणवत्ता वाले भंडार, सख्त नियम और सीमित प्रोसेसिंग इंडस्ट्री है। गुरुवार को संसद में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. राजेंद्र सिंह ने यह जानकारी दी।

राज्यसभा में लिखित जवाब में केंद्रीय राज्य मंत्री सिंह ने कहा कि परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय (एएमडीईआर) ने आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, झारखंड, गुजरात और महाराष्ट्र में फैले मोनाजाइट भंडारों में करीब 7.23 मिलियन टन रेयर अर्थ ऑक्साइड के बराबर संसाधन की पहचान की है।

इसके अलावा गुजरात और राजस्थान के हार्ड रॉक इलाकों में करीब 1.29 मिलियन टन अतिरिक्त दुर्लभ खनिज संसाधन भी पाए गए हैं।

इतने बड़े भंडार होने के बावजूद भारत की आयात पर निर्भरता बनी हुई है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण बताए गए हैं। पहला, घरेलू अयस्क की गुणवत्ता बहुत कम है (करीब 0.056-0.058 प्रतिशत) और इसमें रेडियोएक्टिविटी भी होती है, जिससे इसे निकालना मुश्किल और महंगा हो जाता है; दूसरा, तटीय विनियमन क्षेत्र नियमों, जंगल और मैंग्रोव से जुड़े नियमों के कारण खनन योग्य भंडार सीमित हैं; और तीसरा, देश में रेयर अर्थ को प्रोसेस करके धातु, मिश्र धातु और मैग्नेट बनाने की पर्याप्त इंडस्ट्री नहीं है।

इस कमी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने नवंबर 2025 में एक योजना को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के निर्माण को बढ़ावा देना है। इस योजना के लिए कुल 7,280 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है।

इस योजना के तहत भारत में हर साल 6,000 मीट्रिक टन रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट बनाने की क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए पांच साल में 6,450 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) और 730 करोड़ रुपए की पूंजी सब्सिडी दी जाएगी।

मंत्री ने यह भी बताया कि आंध्र प्रदेश में एक रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट प्लांट स्थापित किया गया है, जहां हर साल 3 टन समेरियम-कोबाल्ट मैग्नेट बनाए जाएंगे, जिनका उपयोग रक्षा और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में होता है।

उन्होंने कहा कि इन प्रयासों को और मजबूत करने के लिए केंद्रीय बजट 2026-27 में ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में विशेष रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने की घोषणा की गई है।

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा, हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस उपकरणों और रक्षा प्रणालियों में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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