6 मई । उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और भाजपा सहयोगी नेता ओमप्रकाश राजभर ने सपा मुखिया अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि ये लोग अब जमीनी संघर्ष से दूर होकर एसी कमरों और सोशल मीडिया पोस्ट की राजनीति तक सिमट गए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ममता बनर्जी से मुलाकात और ईवीएम पर सवाल उठाना दरअसल 2027 में संभावित हार का बहाना तैयार करने की कोशिश है, जबकि जनता अब खुद “सिंहासन” पर बैठकर फैसला कर रही है।
भाजपा के सहयोगी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के मुखिया ओमप्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ममता बनर्जी हफ्तों इंतजार करती रहीं कि अखिलेश यादव अब आएंगे, तब आएंगे, लेकिन अखिलेश यादव नहीं गए। भयानक गर्मी में अखिलेश निकलते कहां हैं? कैसे रैलियां और रोड शो करेंगे? पसीना निकलेगा, गर्मी लगेगी। सुबह उठना भी पड़ेगा।
उन्होंने आगे लिखा कि सबसे अच्छा काम यह है कि दोपहर में उठने के बाद एक ट्वीट कर दिया जाए। वे अब बंगाल भी जा रहे हैं। अब रैली तो करनी नहीं है। एसी की ठंडक में बैठकर ममता बनर्जी को ढांढस बंधाएंगे और गुजारिश करेंगे कि ममता जी, पिछले चुनाव की तरह आप मेरे समर्थन में यूपी जरूर आना।
राजभर ने आगे लिखा कि बंगाल में ममता से मुलाकात के जरिए अखिलेश यादव यूपी को संदेश देंगे कि सब कुछ ईवीएम की वजह से हो रहा है। अखिलेश यह सब अपने लिए कर रहे हैं ताकि 2027 में जब वे हारें तो ईवीएम पर ठीकरा फोड़ सकें। लेकिन शहजादों को याद रखना चाहिए कि अब जनता सिंहासन पर विराजमान है। जहां भी सिंहासन खाली नहीं हो रहा, जनता ने नारा दे दिया है कि “सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।” जय महाराजा सुहेलदेव राजभर, जय ओबीसी समाज, जय भारत।
ज्ञात हो कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार बड़ा उलटफेर देखने को मिला है, जहां भाजपा को पहली बार राज्य में दो-तिहाई से अधिक बहुमत मिला है। इसी के साथ ममता को अपनी पारंपरिक सीट भवानीपुर सीट से हाथ धोना पड़ा। चुनाव नतीजों के बीच ममता बनर्जी ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कई सीटों पर ‘वोट लूट’ हुई है और यह जीत अनैतिक तरीके से हासिल की गई है। उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए और पूरी चुनावी प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण बताया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वह चुनाव नहीं हारी हैं, इसलिए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी।

