रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को एनसीसी की 28 महिला कैडेटों की एक टीम द्वारा शुरू किए गए उच्च-ऊंचाई वाले अभियान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस टीम का नेतृत्व तीन महिला सैन्य अधिकारी कर रही हैं, जिसके तहत वे हिमालय के कुछ सबसे दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण इलाकों से होते हुए 30 दिनों में लगभग 250 किलोमीटर की ट्रेकिंग करेंगी।
यह ट्रेक परांग ला (5,578 मीटर, 18,300 फीट) से होकर गुजरेगा, जो हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी को लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र से जोड़ता है, और इसे देश के सबसे चुनौतीपूर्ण उच्च-ऊंचाई वाले ट्रेकिंग मार्गों में से एक माना जाता है। दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सिंह ने अखिल भारतीय महिला कैडेटों के परांग ला दर्रे को पार करने वाले अभियान ‘अपराजिता’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस दल का नेतृत्व तीनों सेनाओं की तीन महिला अधिकारी कर रही हैं। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) की 28 महिला कैडेट इस अभियान में भाग ले रही हैं, जिनकी औसत आयु 19 वर्ष है और सबसे कम उम्र की प्रतिभागी मात्र साढ़े 16 वर्ष की हैं। इसमें कहा गया है कि अभियान के मार्ग में किब्बर, दुमला, थाल्टक, बोंगरोजेन, परांग ला दर्रा, डाक कारजोंग, नोर्बू सुमदो, कियांगडोम और कोरजोक शामिल हैं, जो उच्च ऊंचाई वाले रेगिस्तानों, ग्लेशियरों, बर्फ के मैदानों और नदी घाटियों को पार करते हैं।
मंत्रालय ने कहा, “अभियान दल, जिसमें अधिकारी, चिकित्सा कर्मचारी, प्रशिक्षक और सहायक कर्मी शामिल हैं, हिमालय के कुछ सबसे दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण इलाकों से होते हुए लगभग 250 किलोमीटर की दूरी 30 दिनों में तय करेगा।” अपने संबोधन में, सिंह ने इतनी चुनौतीपूर्ण उच्च-ऊंचाई वाली अभियान में युवा कैडेटों की भागीदारी को देश की महिलाओं के साहस, दृढ़ संकल्प और बढ़ती क्षमताओं का एक सशक्त प्रमाण बताया।
टीम को सुरक्षित और सफल ट्रेक के लिए शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह के अभियान युवाओं में नेतृत्व क्षमता, मानसिक दृढ़ता, अनुशासन और आत्मविश्वास विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सिंह ने चयनित कैडेटों की शारीरिक और मानसिक तैयारी की सराहना करते हुए इस बात पर जोर दिया कि यह पदयात्रा उनके लिए लचीलेपन, आत्मविश्वास और आत्म-खोज का एक जीवन सबक साबित होगी।
मंत्री ने कहा, “कैडेट परांग ला से न केवल यादगार अनुभवों के साथ लौटेंगे, बल्कि अपनी आंतरिक शक्ति की गहरी समझ के साथ भी लौटेंगे।” यह अभियान दो चरणों में संचालित किया जा रहा है। भाबा-पिन घाटी क्षेत्र में तैयारी और अनुकूलन के लिए एक ट्रेक आयोजित किया गया, जिसके बाद योग्यता के आधार पर एनसीसी महिला कैडेटों की अंतिम टीम का चयन किया गया। मंत्रालय ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य महिला कैडेटों में ‘नारी शक्ति’, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, टीम वर्क, सहनशक्ति और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना है।
सिंह ने टीम के सदस्यों से आग्रह किया कि वे पूरे अभियान के दौरान सुरक्षा, पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के साथ संवाद को अपनी प्राथमिकता बनाए रखें।
“प्रशिक्षकों के निर्देशों का सख्ती से पालन करें, अनावश्यक जोखिमों से बचें और हिमालयी पारिस्थितिकी की रक्षा के लिए शून्य-अपशिष्ट दृष्टिकोण अपनाएं। स्थानीय समुदायों के साथ सम्मानपूर्वक जुड़ें, उनकी संस्कृति और परंपराओं को समझें और उनके अनुभवों से सीखें। यह अभियान आपके जीवन में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बनेगा और आपको जीवन के हर पड़ाव पर ‘अपराजिता’ बने रहने के लिए प्रेरित करेगा,” उन्होंने कैडेटों से कहा।
भूमि, जल और वायु में साहसिक गतिविधियों में एनसीसी कैडेटों की बढ़ती उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए, सिंह ने आगे बढ़कर ‘नारी शक्ति’ की भावना का प्रदर्शन करने वाली महिला कैडेटों की सराहना की। खिल भारतीय एनसीसी निदेशालयों के कैडेटों की भागीदारी पर उन्होंने जोर देते हुए कहा कि उनकी विविध भाषाएं, संस्कृतियां और पृष्ठभूमि, एक साझा मिशन से एकजुट होकर, ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना का उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।
इस अवसर पर एनसीसी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स और एनसीसी तथा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

